E20 Petrol : देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E20) लागू किए जाने को लेकर पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं. इनमें इंजन खराब होने, माइलेज कम होने, वाहन की वारंटी खत्म होने और एथेनॉल उत्पादन में अत्यधिक पानी खर्च होने जैसी बातें शामिल हैं. इन चर्चाओं के बीच शुक्रवार (3 जुलाई) को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 10 प्रमुख बिंदुओं के जरिए इन दावों पर अपना पक्ष रखा. मंत्रालय का कहना है कि E20 से जुड़े कई वायरल दावे तथ्यों पर आधारित नहीं हैं.
मंत्रालय के अनुसार, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) द्वारा किए गए परीक्षणों में E20 ईंधन का वाहनों के सामान्य प्रदर्शन पर कोई बड़ा प्रतिकूल प्रभाव नहीं पाया गया. परीक्षण के दौरान यात्री वाहनों को करीब 40 हजार किलोमीटर और दोपहिया वाहनों को लगभग 20 हजार किलोमीटर तक चलाया गया. जांच में ड्राइविंग अनुभव सामान्य रहा, जबकि ईंधन दक्षता में केवल मामूली अंतर दर्ज किया गया. मंत्रालय ने यह भी कहा कि E20 के अनुरूप तैयार किए गए वाहनों को एथेनॉल की अधिक ऑक्टेन क्षमता का फायदा मिल सकता है.
इंजन खराब होने के दावे खारिज
इंजन को नुकसान पहुंचने या वाहन के धातु एवं प्लास्टिक के पुर्जों पर प्रतिकूल असर पड़ने के दावों को भी सरकार ने खारिज किया है. मंत्रालय ने बताया कि ARAI, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम और सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स की ओर से किए गए अध्ययनों में ऐसी कोई गंभीर तकनीकी समस्या सामने नहीं आई. हालांकि, कुछ पुराने वाहनों में रबर के कुछ हिस्सों को बदलने की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन इसे किसी बड़े तकनीकी जोखिम के रूप में नहीं माना गया है.
वारंटी और बीमा पर मंत्रालय का स्पष्टीकरण
मंत्रालय ने वारंटी और बीमा को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है. सरकार के अनुसार, E20 ईंधन का इस्तेमाल करने से वाहन की वारंटी या बीमा अपने आप समाप्त नहीं होगा. जिन वाहनों को E20 के अनुरूप तैयार किया गया है या जिनके लिए इसकी मंजूरी दी गई है, उन पर पहले की तरह वारंटी और बीमा की शर्तें लागू रहेंगी. मंत्रालय ने कहा कि इस संबंध में फैलाए जा रहे दावे सही नहीं हैं.
पानी की खपत पर भी सरकार ने दिया जवाब
एक लीटर एथेनॉल बनाने में 10 हजार लीटर पानी खर्च होने के वायरल दावे को भी मंत्रालय ने गलत बताया है. सरकार के मुताबिक, एथेनॉल उत्पादन के लिए केवल खाद्य सुरक्षा की जरूरत पूरी होने के बाद बचा हुआ चावल इस्तेमाल किया जाता है. वहीं, डिस्टिलरी में एक लीटर एथेनॉल तैयार करने के लिए लगभग 3 से 5 लीटर प्रोसेस्ड पानी की आवश्यकता होती है. मंत्रालय ने बताया कि अधिकांश इकाइयों में अब ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ प्रणाली अपनाई जा रही है, जिसके तहत पानी का पुनर्चक्रण किया जाता है और उसकी बर्बादी कम होती है.
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