
Padma Shri 2026 : भारतीय महिला हॉकी की दिग्गज खिलाड़ी सविता पूनिया को 23 जून को राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले एक विशेष अलंकरण समारोह में प्रतिष्ठित पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा, जहां राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक प्रदान करेंगी।
308 अंतरराष्ट्रीय मैचों का रिकॉर्ड बनाने वाली गोलकीपर
भारतीय महिला राष्ट्रीय फील्ड हॉकी टीम की पूर्व कप्तान और वर्तमान गोलकीपर सविता भारत की सबसे प्रशंसित खेल हस्तियों में से एक हैं। 308 अंतरराष्ट्रीय मैचों (कैप्स) के अभूतपूर्व आंकड़े के साथ, वह इस असाधारण उपलब्धि को हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला गोलकीपर हैं, जो उनकी अटूट दृढ़ता, कौशल और समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण है।
रियो ओलंपिक क्वालीफिकेशन में निभाई थी निर्णायक भूमिका
11 जुलाई 1990 को हरियाणा के सिरसा जिले में जन्मी सविता की भारतीय हॉकी में निर्णायक भूमिका वर्ष 2016 के रियो ओलंपिक क्वालीफिकेशन के दौरान उजागर हुई। इटली के खिलाफ पेनल्टी शूटआउट में उनके अद्भुत प्रदर्शन से भारत 36 वर्षों बाद पहली बार महिला हॉकी में ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने में सफल रहा। उनकी उत्कृष्ट गोलकीपिंग इस ऐतिहासिक उपलब्धि को हासिल करने में निर्णायक सिद्ध हुई।
अपनी उपलब्धियों को और सुदृढ़ करते हुए, उन्होंने टोक्यो ओलंपिक 2020 में भी शानदार प्रदर्शन किया। उनके निर्णायक गोलकीपिंग कौशल ने भारत को पहली बार महिला हॉकी में ओलंपिक सेमीफाइनल में पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस प्रदर्शन ने भारतीय महिला हॉकी के लिए नया कीर्तिमान स्थापित किया और उन्हें ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त द्वारा सम्मानपूर्वक “द ग्रेट वॉल” की उपाधि प्रदान की गई।
कप्तानी में भारतीय हॉकी को मिली नई ऊंचाई
वर्ष 2021 से 2024 तक कप्तान के रूप में सविता ने टीम की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को एक नई ऊंचाई तक पहुंचाया। उनके नेतृत्व में भारत ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कीं, जिनमें प्रमुख अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में पदक शामिल हैं।
इनमें वर्ष 2022 एशियाई खेलों में कांस्य पदक, वर्ष 2022 राष्ट्रमंडल खेलों में कांस्य पदक (पदकों के 16 वर्ष के सूखे को समाप्त करते हुए) और एफआईएच नेशंस कप 2022 में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक शामिल हैं। इस जीत से भारत प्रतिष्ठित एफआईएच प्रो लीग वर्ष 2023-24 के लिए क्वालीफाई कर पाया, जिससे टीम की वैश्विक स्थिति और मजबूत हुई।
खेल के साथ सामाजिक बदलाव की भी बनीं आवाज
मैदान पर उत्कृष्ट उपलब्धियों से आगे बढ़कर सविता सामाजिक परिवर्तन के प्रति भी गहराई से प्रतिबद्ध हैं, विशेष रूप से अपने गृह राज्य हरियाणा में। सिरसा जिले में ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान की ब्रांड एंबेसडर के रूप में वह लड़कियों की शिक्षा, लैंगिक समानता और युवा सशक्तिकरण के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।
उनके सक्रिय योगदान में प्रेरक भाषण, मेंटरशिप कार्यक्रम और खेल उपकरण वितरण गतिविधियां शामिल हैं, जिन्होंने शिक्षा और खेल में लड़कियों की भागीदारी को बढ़ाने तथा पारंपरिक लैंगिक भूमिकाओं के प्रति दृष्टिकोण बदलने में मदद की है। साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से लेकर अंतरराष्ट्रीय ख्याति तक का उनका सफर अनगिनत युवा खिलाड़ियों, विशेष रूप से लड़कियों को सामाजिक बाधाओं से आगे बढ़कर अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करता है।
लगातार तीन बार बनीं एफआईएच गोलकीपर ऑफ द ईयर
सविता की लगातार उत्कृष्टता इस बात से भी झलकती है कि उन्हें तीन लगातार सत्रों (2020-21, 2021-22, 2022-23) के लिए एफआईएच गोलकीपर ऑफ द ईयर पुरस्कार दिया गया है। यह भारतीय हॉकी के इतिहास में एक बेमिसाल उपलब्धि है।
घरेलू स्तर पर भी उन्हें हॉकी इंडिया द्वारा कई बार सम्मानित किया गया है, जिसमें उन्हें प्लेयर ऑफ द ईयर और गोलकीपर ऑफ द ईयर जैसे पुरस्कार प्राप्त हुए। उनकी उत्कृष्ट सेवा और खेल उपलब्धियों के लिए उन्हें वर्ष 2018 में भारत के सबसे प्रतिष्ठित खेल सम्मान अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
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