MP News : कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर सीबीएसई द्वारा कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन-भाषा नीति को सत्र के बीच में अनिवार्य रूप से लागू किए जाने पर चिंता जताई है और इस फैसले को फिलहाल टालने की मांग की है.
दिग्विजय सिंह, जो शिक्षा, महिला, बाल, युवा एवं खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष भी हैं, ने कहा कि नई व्यवस्था को लागू करने से पहले पर्याप्त शिक्षक, पाठ्य सामग्री और आधारभूत तैयारी की जरूरत होती है. उनके अनुसार, बिना पूरी तैयारी के बीच सत्र में इस तरह का बदलाव शिक्षा व्यवस्था में अव्यवस्था पैदा कर सकता है.
OSM लागू करने में पहले भी दिक्कतें आईं
उन्होंने अपने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि ऐसी स्थिति पहले सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली (OSM) को जल्दबाजी में लागू करने के दौरान भी देखी गई थी, जिससे कई तरह की दिक्कतें सामने आई थीं.
दिग्विजय सिंह ने बताया कि दिसंबर 2025 में सीबीएसई की शासी निकाय बैठक में यह निर्णय लिया गया था कि एनसीईआरटी द्वारा भाषा संबंधी ग्रेडेड पाठ्यपुस्तकें जारी होने तक स्कूल पुरानी अध्ययन व्यवस्था जारी रखेंगे. इसके बावजूद 15 मई 2026 को सीबीएसई की ओर से एक परिपत्र जारी कर 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 में तीसरी भाषा को लागू करने के निर्देश दिए गए.
सीबीएसई के फैसले पर उठे सवाल
उन्होंने यह भी कहा कि एनसीईआरटी द्वारा अभी तक भाषा की नई ग्रेडेड पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं कराई गई हैं, जिसके चलते कई स्कूलों को छठी कक्षा की पुस्तकों पर निर्भर रहना पड़ रहा है.
दिग्विजय सिंह ने सवाल उठाया कि जब शासी निकाय का निर्णय अलग था, तो सीबीएसई ने किस आधार पर इसमें बदलाव किया, और वह भी ऐसे समय में जब देशभर के स्कूलों की शैक्षणिक योजना प्रभावित हो सकती है.
नीट-यूजी गड़बड़ियों पर पहले भी उठाए सवाल
गौरतलब है कि इससे पहले भी उन्होंने नीट-यूजी परीक्षा में कथित अनियमितताओं और प्रश्नपत्र लीक के मामलों को लेकर प्रधानमंत्री को पत्र लिखते हुए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की परीक्षाओं पर एक श्वेत पत्र जारी करने की मांग की थी.
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