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कुरमाली भाषा को अष्टम सूची में शामिल करने की मांग तेज, कुड़मी समाज ने आंदोलन की दी चेतावनी

Jharkhand News : झारखंड में कुरमाली भाषा को संविधान की अष्टम सूची में शामिल करने की मांग को लेकर कुड़मी समाज ने अपना आंदोलन और तेज करने का ऐलान किया है। रांची के पुराने विधानसभा सभागार में हुई बैठक में झारखंड कुड़मी समन्वय समिति ने केंद्र सरकार को 60 दिनों का अल्टीमेटम दिया है। मांग पूरी नहीं होने पर आर्थिक नाकेबंदी की चेतावनी दी गई है।

60 दिनों का अल्टीमेटम, आर्थिक नाकेबंदी की तैयारी

बैठक में समिति ने साफ कहा कि अगर तय समय सीमा में कुरमाली भाषा को संवैधानिक सूची में जगह नहीं मिलती, तो झारखंड में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। इसके तहत राज्य में आर्थिक नाकेबंदी जैसे कदम उठाए जाने की बात कही गई है।

सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप

समिति अध्यक्ष शीतल ओहदार ने आरोप लगाया कि चुनाव प्रचार के दौरान कुरमाली भाषा को अष्टम सूची में शामिल करने का वादा किया गया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसे लेकर समाज में नाराजगी बढ़ रही है।

पहले भी हो चुके हैं बड़े आंदोलन

कुड़मी समाज ने इससे पहले रेल रोको आंदोलन भी किया था, जिससे रेलवे सेवाएं प्रभावित हुई थीं। उस समय केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक मांग पूरी नहीं हुई, जिससे असंतोष और बढ़ गया है।

खनिज आपूर्ति रोकने की चेतावनी

समिति ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यदि 60 दिनों के भीतर मांग पूरी नहीं होती है, तो झारखंड से कोयला, लोहा और अन्य खनिजों की आपूर्ति रोक दी जाएगी। यहां तक कहा गया कि राज्य से किसी भी प्रकार का खनिज बाहर नहीं जाने दिया जाएगा।

जातीय जनगणना पर भी चर्चा

बैठक में जातीय जनगणना के मुद्दे पर भी विचार किया गया। समिति ने कहा कि इस विषय पर आगे की रणनीति अगली बैठक में तय की जाएगी।

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