US Iran Tensions : अमेरिका-ईरान के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ता हुआ नजर आ रहा है, जिसका सीधा असर दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पड़ रहा है. इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी दबाव बनता दिख रहा है.
कुछ दिन पहले उम्मीद जताई जा रही थी कि इस रणनीतिक रास्ते पर स्थिति सामान्य हो जाएगी और आवाजाही बिना रुकावट जारी रहेगी, लेकिन हालिया घटनाक्रम ने हालात को फिर से उलझा दिया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में इस इलाके में तेजी से तनाव बढ़ा है और समुद्री गतिविधियों पर असर पड़ा है. बताया जा रहा है कि शनिवार को दो भारतीय जहाजों को गोलीबारी जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा, जिसके बाद उन्हें अपने रास्ते से लौटना पड़ा. हाल ही में ईरान की ओर से यह संकेत दिया गया था कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को व्यापारिक आवाजाही के लिए खोला जा सकता है, जिससे वैश्विक तेल बाजार में भी राहत देखी गई थी. तेल की कीमतों में गिरावट और सप्लाई चेन में सुधार की उम्मीदें भी जगी थीं. लेकिन यह स्थिरता ज्यादा देर टिक नहीं सकी.
ट्रंप के बयान से फिर बढ़ा तनाव
अमेरिका कि तरफ से आए बयान से स्थिति एक बार फिर से तनावपूर्ण हो गई है. वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि जब तक ईरान के साथ पूरी तरह समझौता नहीं हो जाता, तब तक किसी भी तरह की पाबंदियों में ढील नहीं दी जाएगी. इसके बाद ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कड़े तेवर दिखाते हुए संकेत दिया कि क्षेत्र में निगरानी और सख्ती बढ़ाई जाएगी, और संदिग्ध गतिविधियों पर कार्रवाई की जा सकती है.
समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय तनाव पर नजर
इसी बीच, समुद्री मार्ग से गुजर रहे दो भारतीय जहाजों को कथित तौर पर खतरे का सामना करना पड़ा, जिसके बाद उनकी वापसी कराई गई. इस घटना के बाद भारत सरकार ने ईरानी प्रतिनिधि को विदेश मंत्रालय में तलब कर स्थिति पर स्पष्टीकरण मांगा है.
जानकारों का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम में समुद्री सुरक्षा बलों की सक्रियता बढ़ गई है और क्षेत्र में किसी भी तरह की गलतफहमी बड़े संकट को जन्म दे सकती है. ईरान की ओर से यह भी कहा गया है कि जब तक बाहरी दबाव और प्रतिबंधों की स्थिति बनी रहती है, तब तक इस मार्ग पर नियंत्रण सख्त रखा जाएगा.
परमाणु कार्यक्रम पर विवाद की जड़
इस पूरे विवाद की जड़ ईरान के परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन से जुड़े मुद्दों को माना जा रहा है. दोनों देशों के बीच चल रही कूटनीतिक बातचीत पहले ही कई चरणों में पहुंच चुकी है और अगला दौर जल्द शुरू होने की संभावना जताई जा रही है. विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिन इस क्षेत्र की स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं.
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