Women Reservation Bill : लोकसभा में पिछले दो दिनों के दौरान महिला आरक्षण से जुड़े प्रस्तावों पर तीखी बहस देखने को मिली. सरकार ने इन विधेयकों को पारित कराने के लिए पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन विपक्ष के कड़े रुख के चलते मामला अटक गया और आवश्यक समर्थन नहीं जुट पाया.
सूत्रों के अनुसार, सरकार की ओर से गृह मंत्री अमित शाह ने इन विधेयकों को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभाई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सदन में अपने संबोधन के दौरान राजनीतिक सहमति बनाने की कोशिश करते हुए समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को अपना मित्र बताया था. इसके बावजूद विपक्ष अपने रुख पर कायम रहा और सरकार की रणनीति सफल नहीं हो सकी.
मतदान में सरकार को नहीं मिला दो-तिहाई बहुमत
मतदान के दौरान स्थिति पूरी तरह से साफ हो गई, जब अधिकांश विपक्षी दलों ने न सिर्फ बहस में विरोध जताया, बल्कि वोटिंग में भी सरकार के खिलाफ मतदान किया. कुल 528 सांसदों ने इस प्रक्रिया में हिस्सा लिया, जिनमें से 298 मत पक्ष में और 230 मत विपक्ष में पड़े. हालांकि, इन विधेयकों को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोटों की आवश्यकता थी, जिसे सरकार हासिल नहीं कर सकी.
आगे की प्रक्रिया और महिला आरक्षण कानून
अब सरकार के सामने आगे की प्रक्रिया के तौर पर संयुक्त सत्र का विकल्प बचा हुआ है. गौरतलब है कि महिला आरक्षण से जुड़ा मूल कानून पहले से मौजूद है, जिसके अनुसार इसे 2034 के लोकसभा चुनाव में लागू किया जाना है. नए प्रस्तावों का उद्देश्य इस आरक्षण को समय से पहले लागू करने का था, लेकिन फिलहाल यह प्रयास सफल नहीं हो सका.
कौन कौन से बिल थे-
इन प्रस्तावों में शामिल प्रमुख विधेयक थे
• 131वां संविधान संशोधन विधेयक 2026
• परिसीमन विधेयक 2026
• केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक 2026
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