Maharashtra Politics : महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर उठापटक तेज हो गई है. शिवसेना (UBT) के भीतर संभावित टूट की चर्चाओं ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पार्टी के सात लोकसभा सांसद अलग गुट बनाकर अपनी राजनीतिक दिशा तय करने पर विचार कर रहे हैं. कहा जा रहा है कि ये सांसद लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर अलग समूह के रूप में मान्यता मांग सकते हैं. यदि उन्हें मान्यता मिलती है, तो आगे चलकर उनका एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट में शामिल होने का रास्ता खुल सकता है.
जानकारी के अनुसार, प्रस्तावित बैठक से पहले सभी सांसद दिल्ली में सांसद श्रीकांत शिंदे के आवास पर जुट सकते हैं. महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के भी इस दौरान मौजूद रहने की संभावना जताई जा रही है.
संगठन के मजबूत चेहरा संजय जाधव
इन चर्चाओं के केंद्र में मुंबई उत्तर-पूर्व से सांसद संजय दीना पाटिल हैं. मुंबई की राजनीति में उनकी लंबे समय से सक्रिय भूमिका रही है. वे विधायक और सांसद दोनों के रूप में काम कर चुके हैं तथा मुंबई के उपनगरीय क्षेत्रों में उनका प्रभाव माना जाता है.
परभणी से सांसद संजय जाधव को मराठवाड़ा में शिवसेना के वरिष्ठ नेताओं में गिना जाता है. वे कई बार लोकसभा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और क्षेत्र में पार्टी संगठन के मजबूत चेहरों में शामिल हैं.
मराठवाड़ा के मजबूत नेता संजय जाधव
वहीं, नासिक के सांसद राजाभाऊ वाजे पहले सिन्नर से विधायक रह चुके हैं. उत्तरी महाराष्ट्र में उनका राजनीतिक आधार मजबूत माना जाता है. संसद में उन्होंने सफाईकर्मियों और पुनर्वास से जुड़े विषयों को उठाया है.
शिरडी लोकसभा क्षेत्र के सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे अहमदनगर जिले की राजनीति में एक महत्वपूर्ण नाम हैं. वे पहले भी इसी सीट से सांसद रह चुके हैं और किसानों, सिंचाई तथा ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं. यवतमाल-वाशिम का प्रतिनिधित्व करने वाले संजय देशमुख को विदर्भ क्षेत्र में पार्टी की मौजूदगी मजबूत करने वाले नेताओं में माना जाता है. उनका राजनीतिक अनुभव राज्य स्तर की राजनीति से भी जुड़ा रहा है.
धाराशिव से सांसद ओमराजे निम्बालकर
हिंगोली से सांसद नागेश पाटिल अष्टिकर संगठनात्मक अनुभव रखने वाले नेता हैं. वे पहले विधायक भी रह चुके हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी पहचान कृषि एवं विकास से जुड़े मुद्दों को लेकर रही है.
धाराशिव से सांसद ओमराजे निम्बालकर मराठवाड़ा के प्रमुख युवा नेताओं में शामिल हैं. वे लगातार दो बार लोकसभा के लिए चुने जा चुके हैं और अपने क्षेत्र में सूखा, जल संकट तथा बेरोजगारी जैसे विषयों को प्रमुखता से उठाते रहे हैं.
इन सात सांसदों को लेकर चल रही चर्चाओं ने महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों की संभावनाओं को लेकर अटकलों का दौर तेज कर दिया है.
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