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महाराष्ट्र से लेकर MP-राजस्थान तक मानसून का कहर, 50kmph हवाओं ने उड़ाया सब कुछ

Monsoon Update : मानसून ने रविवार को देश के चार और राज्यों त्रिपुरा, नगालैंड, असम और अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश कर लिया है। महाराष्ट्र में यह अब केवल दक्षिण कोंकण क्षेत्र तक ही आगे बढ़ा है। इसके प्रभाव से सिंधुदुर्ग और रत्नागिरी में 9 जून तक भारी बारिश की संभावना जताई गई है, हालांकि अगले सप्ताह तक महाराष्ट्र में बारिश की गतिविधियां कमजोर रहने का अनुमान है।

कई हिस्सों में गर्मी का कहर

भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, मानसून के सक्रिय रहने से केरल, कर्नाटक, गोवा और तमिलनाडु के कई हिस्सों में लगातार बारिश हो रही है। दूसरी ओर तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में लगातार पांचवें दिन तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया है, जिससे उमस और गर्मी का असर बढ़ गया है।

50 KM प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं

देश के अधिकांश हिस्सों में, गुजरात को छोड़कर, प्री-मानसून बारिश का दौर जारी है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, झारखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश समेत उत्तर-पूर्वी राज्यों में शनिवार को कई स्थानों पर तेज बारिश दर्ज की गई। मध्य प्रदेश में भोपाल सहित चार जिलों में करीब 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं, जबकि राजस्थान के बीकानेर में बारिश के साथ ओले गिरे। उत्तर प्रदेश के मऊ और गाजीपुर में भी बारिश दर्ज की गई।

केरल में मानसून की शुरुआत 4 जून

मानसून ने तीन दिन की देरी के बाद रफ्तार पकड़ ली है और चार दिनों के भीतर ही सात राज्यों में अपनी पहुंच बना ली है। शनिवार को यह आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मिजोरम और मणिपुर तक पहुंचा, जबकि इससे पहले शुक्रवार को कर्नाटक, तमिलनाडु और गोवा में मानसून ने दस्तक दी थी। केरल में मानसून की शुरुआत 4 जून को हुई थी।

IMD का अनुमान है कि आने वाले तीन दिनों में मानसून पूरे पूर्वोत्तर राज्यों के साथ पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों तक पहुंच सकता है। इसके बाद अगले 10 दिनों में बिहार, झारखंड और ओडिशा तक इसके विस्तार की संभावना जताई गई है।

इन राज्यों में मानसून की रफ्तार धीमी

स्काईमेट वेदर के मौसम विशेषज्ञ के अनुसार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में मानसून की गति फिलहाल धीमी रह सकती है, क्योंकि बंगाल की खाड़ी में इसे आगे बढ़ाने के लिए कोई मजबूत मौसम प्रणाली सक्रिय नहीं है।

तापमान पर पड़ेगा बड़ा असर

इसी बीच यूरोपीय मौसम एजेंसी की रिपोर्ट में प्रशांत महासागर में अल नीनो बनने की प्रक्रिया शुरू होने की बात कही गई है। ताजा आंकड़ों के अनुसार समुद्र की सतह का तापमान उस स्तर से ऊपर पहुंच चुका है, जिसे अल नीनो की शुरुआत माना जाता है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि दिसंबर तक समुद्री तापमान सामान्य से लगभग 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है, जिसका वैश्विक तापमान पर बड़ा असर पड़ने की संभावना है।

4 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि की चेतावनी

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति बनी रहती है, तो इस बार का अल नीनो 2015-16 और 1997-98 की तुलना में अधिक प्रभावशाली हो सकता है। पिछली घटनाओं में नीनो 3.4 इंडेक्स औसत से 2.3 डिग्री सेल्सियस तक ऊपर गया था, जबकि कुछ अनुमानों में इस बार 4 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि की चेतावनी दी जा रही है, जिसे गंभीर जलवायु संकेत माना जा रहा है।

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