Iran US War : ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक बाजारों के साथ-साथ भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है. पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और लाल सागर में तेल टैंकरों पर हुए हमलों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिला है.
ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचकर 100.69 डॉलर तक पहुंच गई है. इससे पहले मार्च और अप्रैल में होर्मुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने के कारण कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं. जून में अंतरिम युद्धविराम के बाद कीमतों में कुछ राहत मिली थी, लेकिन जुलाई में तनाव फिर बढ़ गया है.
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे में तेल की कीमतों में तेजी से देश का आयात बिल बढ़ सकता है. इसी बीच भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 95.11 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है.
वैश्विक संकट के समय निवेशक सोने को सुरक्षित निवेश मानते हैं. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सोने की कीमतें भी उछलकर 4,100 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गई हैं, जिससे इसकी मांग में तेजी देखने को मिल रही है.
आम लोगों की जेब पर असर
कच्चा तेल महंगा होने से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है. इससे परिवहन लागत बढ़ेगी, जिसका असर दूध, फल, सब्जियों समेत रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है. महंगाई बढ़ने की स्थिति में भारतीय रिजर्व बैंक के लिए ब्याज दरों में कटौती करना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है, जिससे होम लोन और अन्य कर्ज सस्ते होने की संभावना कम हो सकती है.
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