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पंजाब के सात जिलों में बाढ़ से भारी तबाही, रावी का जलस्तर पहुंचा रिकॉर्ड स्तर : कैबिनेट मंत्री मंत्री बरिंदर गोयल

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  • पंजाब के सात जिलों में बाढ़ से भारी तबाही
  • रावी में रिकॉर्ड 14.11 लाख क्यूसेक पानी दर्ज
  • अब तक 11,330 लोग सुरक्षित निकाले गए
  • पशुधन के लिए राहत केंद्र और चारा उपलब्ध
  • गोयल बोले– राजनीति छोड़ मिलकर काम करें

Punjab News : कैबिनेट मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने बताया कि नियंत्रित जल निकासी के बावजूद खड्डों और नालों से अचानक आई बाढ़ का पानी भारी तबाही का कारण बना, जिससे राज्य के सात जिलों में अब तक की सबसे बड़ी तबाही दर्ज की गई.

मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने बताया कि वर्ष 1988 में रावी नदी में अधिकतम 11.20 लाख क्यूसेक पानी दर्ज किया गया था, जबकि इस वर्ष यह आंकड़ा 14.11 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया. इसमें से लगभग 2.15 लाख क्यूसेक पानी रणजीत सागर डैम से छोड़ा गया, जबकि बाकी पानी हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और पंजाब के खड्डों, नालों और कैचमेंट क्षेत्रों से आया. “इस अभूतपूर्व जल स्तर के कारण रावी नदी से जुड़े तीन जिलों को सीधा प्रभाव झेलना पड़ा, जबकि चार अन्य जिलों में ब्यास और सतलुज नदियों की बाढ़ ने भारी नुकसान पहुंचाया. इससे फसलें, पशुधन और रिहायशी क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुए.

एनडीआरएफ-सेना की मदद से 110 लोग एयरलिफ्ट

राहत और बचाव कार्य पर जोर देते हुए कैबिनेट मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली सरकार ने समय पर राहत कार्य सुनिश्चित किए. अब तक 11,330 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया और 87 राहत शिविरों में शरण दी गई, जहां भोजन, आश्रय और चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराई गईं. एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और सेना की मदद से लगभग 110 लोगों को हवाई मार्ग से सुरक्षित निकाला गया. पंजाब सरकार की पहली प्राथमिकता हर जीवन को बचाना रही. जिला अधिकारियों से लेकर पटवारियों और स्वयंसेवकों तक, सरकार का हर हिस्सा लोगों के साथ मिलकर जमीन पर काम कर रहा था.

पशुधन के लिए चारा उपलब्ध

पशुधन की सुरक्षा पर भी सरकार की विशेष नजर रही. जल संसाधन मंत्री ने बताया कि फिरोजपुर और फाजिल्का के प्रभावित क्षेत्रों में मंडी समितियों के शेड और राहत केंद्रों का उपयोग पशुओं के लिए किया गया. सरकार और स्वयंसेवी संगठनों द्वारा बड़ी मात्रा में चारा उपलब्ध कराया गया, उन्होंने कहा, हमारी सरकार ने पशुओं को विशेष प्राथमिकता दी क्योंकि वे अपनी पीड़ा व्यक्त नहीं कर सकते. हमने सुनिश्चित किया कि कोई भी जानवर बेसहारा न रहे.

राहत कार्य में सहयोग के लिए सभी से एकजुटता की अपील

विपक्ष की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए बरिंदर कुमार गोयल ने कहा कि यह समय आरोप-प्रत्यारोप का नहीं, बल्कि मिलकर काम करने का है, उन्होंने सभी राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक नेताओं से अपील की कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर राहत कार्यों में पूरा सहयोग दें, उन्होंने यह भी मांग की कि राज्य सरकारों को नुकसान का मूल्यांकन करने और राष्ट्रीय आपदा कोष से मुआवजा देने का अधिकार दिया जाना चाहिए, क्योंकि राज्य ही जमीनी हकीकत के सबसे नजदीक होते हैं.

इस बैठक में प्रमुख रूप से मुख्य अभियंता (मुख्यालय) जितेंद्र पाल सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे.

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