
UP Politics : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दल अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं. भाजपा की ओर से संगठन और सरकार दोनों स्तर पर गतिविधियां तेज हैं. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन लखनऊ का दौरा कर चुके हैं, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी लगातार प्रदेश के अलग-अलग इलाकों का दौरा कर रहे हैं.
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है. कांग्रेस की ओर से प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और सांसद इमरान मसूद लगातार अपनी बात रख रहे हैं. इमरान मसूद ने कहा कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन का ही असर था कि समाजवादी पार्टी 37 सीटें जीत सकी. उनका यह भी कहना है कि गठबंधन की जरूरत कांग्रेस से ज्यादा समाजवादी पार्टी को थी.
कांग्रेस के बयानों पर प्रतिक्रिया
समाजवादी पार्टी की ओर से अब तक उदयवीर सिंह ने कांग्रेस के बयानों पर प्रतिक्रिया दी है. वहीं पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने केवल इतना कहा है कि दोनों दल मिलकर चुनाव लड़ेंगे.
राजनीतिक चर्चाओं में 143 ऐसी विधानसभा सीटों का जिक्र किया जा रहा है, जहां मुस्लिम मतदाताओं का प्रभाव माना जाता है. माना जा रहा है कि इन्हीं सीटों को लेकर दोनों दल अपनी-अपनी दावेदारी मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, करीब 70 सीटों पर मुस्लिम आबादी 20 से 30 प्रतिशत के बीच है, जबकि 43 सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम आबादी 30 प्रतिशत से अधिक बताई जाती है.
07 सीटों पर चुनावी नतीजों पर असर
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लगभग 36 विधानसभा सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार अपने दम पर जीत दर्ज करने की स्थिति में हो सकते हैं, जबकि 107 सीटों पर मुस्लिम मतदाता चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं.
राजनीतिक विश्लेषण में यह भी माना जा रहा है कि समाजवादी पार्टी यादव और अन्य पिछड़ा वर्ग के साथ-साथ दूसरे वर्गों को भी अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है. वहीं कांग्रेस भी विधानसभा चुनाव में गठबंधन के तहत अधिक सीटों की दावेदारी कर रही है. ऐसे में आने वाले समय में सीट बंटवारे को लेकर दोनों दलों के बीच बातचीत अहम रहने वाली है.
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