Iran War : अयातुल्ला अली ख़ामेनेई की मौत पर कैसरगंज से पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह का बयान चर्चा में बना हुआ है। उन्होंने शिया समुदाय द्वारा किए जा रहे प्रदर्शन को जायज बताया। ईरान पर हमले और ख़ामेनेई की मौत के बाद देश के विभिन्न शहरों में शिया समुदायों ने प्रदर्शन किया है।
जिसको लेकर देश में कहीं विरोध तो कहीं समर्थन जारी है। भारत के कई राजनेताओं ने भी इस पर बयान दिया है। एक ओर जहां सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ईरान पर हमले को क्रूर बताया तो वहीं वरिष्ठ कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने भारत की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं।
बृजभूषण सिंह का शिया समुदाय को समर्थन
अपने ही पार्टी के विधायक राजेश्वर सिंह से अलग स्टैंड लेते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि ख़ामेनेई की मौत से उनके समुदाय के लोग गम में है, वे मातम मना रहे हैं। उनका दुख जायज है। इस घटना से पूरा देश चिंतित है। उन्होंने कहा कि उनकी भावनाओं को ठेस पहुंची है उनका आक्रोश जायज है।
वे भी चाहते हैं कि हिंसा बंद होनी चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इस हिंसा से पूरी दुनिया को नुकसान हो रहा है, खेल जगत के साथ-साथ तमाम देशों की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हुई है। शेयर मार्केट गिर रहे हैं। साथ ही बातचीत के जरिए समाधान निकालने पर जोर दिया।
अखिलेश यादव की 165 छात्राओं को श्रद्धांजलि
सपा प्रमुख ने दक्षिणी ईरान के मीनाब शहर में मृत स्कूली छात्राओं को श्रद्धांजली दी, और ईरान पर हुए हमले का विरोध किया है। जेनेवा कन्वेंशन और अंतर्राष्ट्रीय कानूनों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह के इजरायली-अमेरिकी हमले खतरनाक हैं। इस हमले में मृत 165 छात्राओं की शहादत को उन्होंने नमन किया।
भारत सरकार की चुप्पी पर उठे सवाल
ईरान पर हुए हमले को लेकर भारत सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया। इस पर वरिष्ठ कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने ईरान पर हुए हमले पर भारत सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाया। उन्होंने भारत-ईरान के सभ्यतागत और रणनीतिक संबंधों को भी याद दिलाया। अपने बयान में सोनिया गांधी ने इजरायल-अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए लक्षित हमलों का विरोध किया।
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