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FCRA Bill पर सरकार का बड़ा फैसला, JPC को भेजने की तैयारी; PM मोदी से मिले रिजिजू, फिर स्पीकर से की मुलाकात

FCRA Bill : एफसीआरए संशोधन विधेयक को लेकर केंद्र सरकार अब संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC का विकल्प तलाश रही है. संसद में विधेयक को आगे बढ़ाने से पहले इसे विस्तृत जांच और चर्चा के लिए समिति के पास भेजे जाने की संभावना है. सरकार और विपक्ष के बीच इस विधेयक को लेकर पहले से मतभेद बने हुए हैं.

प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात की. इसके अलावा उन्होंने विपक्षी दलों के नेताओं से भी बातचीत की है. माना जा रहा है कि सरकार की कोशिश विधेयक को लेकर संसद में बने गतिरोध को कम करने और सभी पक्षों के बीच सहमति बनाने की है.

विपक्ष विधेयक वापस लेने की मांग पर अड़ा

विपक्षी दलों का कहना है कि विदेशी योगदान से जुड़े नियमों में बदलाव करने वाले इस महत्वपूर्ण कानून पर व्यापक चर्चा होनी चाहिए. विपक्ष के एक वर्ग की मांग है कि विधेयक को मौजूदा स्वरूप में वापस लिया जाए और सभी पक्षों से बातचीत के बाद नए सिरे से प्रावधान तैयार किए जाएं.

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की सांसद सुप्रिया सुले ने भी विधेयक के मौजूदा स्वरूप पर सवाल उठाते हुए इसे वापस लेने या JPC के पास भेजने की मांग की है. उनका कहना है कि विदेशी योगदान से जुड़े नियमों का असर सामाजिक संस्थाओं और अन्य संगठनों पर पड़ सकता है.

DMK ने अमित शाह से की मुलाकात

FCRA विधेयक का विरोध करने वालों में DMK भी शामिल है. पार्टी सांसद पी. विल्सन के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. DMK ने विधेयक वापस लेने के साथ मौजूदा कानून की धारा 15 हटाने की मांग रखी है. पार्टी ने वैकल्पिक तौर पर कानून की व्यापक समीक्षा और विधेयक को JPC के पास भेजने की मांग की है.

संसद में सहमति बनाना सरकार के लिए चुनौती

वहीं, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और वाम दलों समेत कई विपक्षी पार्टियां FCRA विधेयक पर आपत्ति जता चुकी हैं. ऐसे में सरकार के सामने संसद में सहमति बनाने की चुनौती है.

सोमवार को हुई कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में FCRA विधेयक और प्रस्तावित परिसीमन विधेयक का उल्लेख नहीं हुआ. इसके बाद दोनों विधेयकों को मौजूदा सत्र में आगे बढ़ाने को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं.

अब नजर इस बात पर है कि सरकार FCRA विधेयक को JPC के पास भेजती है या मौजूदा स्वरूप में ही आगे बढ़ाने का फैसला करती है.

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