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पंजाब पुलिस का वॉर रूम, ऑर्गनाइज़्ड क्राइम के खिलाफ लड़ाई में डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल

Chandigarh : पंजाब में एक सुरक्षित ऑपरेशन रूम में, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल मैप और इंटेल अलर्ट से स्क्रीन चमकती हैं, जबकि राज्य भर के जिलों से फील्ड अपडेट के साथ फोन बजते रहते हैं।

गैंग हिंसा को रोकने में इस्तेमाल

अंदर मौजूद अधिकारियों के लिए, यह संगठित अपराध के खिलाफ लगातार लड़ाई का केंद्र है- जिसका मकसद लेटेस्ट डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल करके, पहली गोली चलने से पहले ही गैंग हिंसा को रोकना है।

टेक्नोलॉजी के साथ होगा ऑपरेशन

मंगलवार को एक ऑफिशियल बयान में कहा गया कि पिछले कुछ सालों में, पंजाब पुलिस इंटेलिजेंस-लेड पुलिसिंग की ओर बढ़ी है, जिसमें ह्यूमन इंटेलिजेंस को टेक्नोलॉजी के साथ मिलाकर, गैंगस्टर नेटवर्क को ट्रैक किया जा रहा है जो राज्यों और यहां तक ​​कि कॉन्टिनेंट्स में भी काम करते हैं।

पंजाब पुलिस का वार रूम कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल नक्शों और खुफिया जानकारी से हर समय सक्रिय रहता है। राज्य भर के जिलों से मिलने वाले फील्ड अपडेट के साथ फोन लगातार बजते रहते हैं। यहां काम करने वाले अधिकारियों के लिए यह संगठित अपराध के खिलाफ एक शांत लेकिन निरंतर चलने वाली लड़ाई का केंद्र है- जिसका उद्देश्य गैंगस्टरों द्वारा किसी वारदात को अंजाम देने से पहले ही उसे रोक देना है।

इंटेलिजेंस आधारित पुलिसिंग की दिशा

पिछले कुछ वर्षों में पंजाब पुलिस प्राप्त खुफिया जानकारी को तकनीक के साथ जोड़कर राज्यों और यहां तक कि विदेशों में बैठकर काम कर रहे गैंगस्टरों के नेटवर्क को ट्रैक करने के लिए इंटेलिजेंस आधारित पुलिसिंग की दिशा में लगातार कदम बढ़ा रही है। राज्य में सक्रिय अधिकांश बड़े गिरोह अब विकेंद्रीकृत सेल के माध्यम से काम करते हैं, जहां विदेश में बैठे हैंडलर निर्देश जारी करते हैं और स्थानीय सहयोगी वारदातों को अंजाम देते हैं।

त्वरित कार्रवाई करने की क्षमता

इस बढ़ते खतरे का मुकाबला करने के लिए जांच एजेंसियां अब डिजिटल उपकरणों का सहारा ले रही हैं, जो उन्हें प्राप्त जानकारी के आधार पर त्वरित कार्रवाई करने की क्षमता देते हैं। सबसे महत्वपूर्ण पहलों में से एक डेटा-आधारित आपराधिक डेटाबेस और वॉइस रिकग्निशन सिस्टम का उपयोग है।

फिरौती और धमकी भरी कॉल

हाल ही में पंजाब पुलिस ने अपराधियों और संदिग्धों के 72,000 से अधिक आवाज़ नमूने पंजाब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम (पी ए आई सी) में शामिल किए हैं। यह एक मोबाइल आधारित एप्लिकेशन है, जो फिरौती और धमकी भरी कॉल करने वाले व्यक्तियों की जल्दी पहचान करने में मदद करता है।

डराने-धमकाने के लिए किया जाता है इस्तेमाल

यह तकनीक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जबरन वसूली के रैकेट राज्य में गैंगस्टर गतिविधियों का एक बड़ा हिस्सा बनते जा रहे हैं। जांचकर्ताओं का कहना है कि कई धमकी भरी कॉल इंटरनेट आधारित कॉलिंग या एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए की जाती हैं, जो अक्सर विदेशी नंबरों से आती हैं, जबकि स्थानीय शूटरों को पीड़ितों को डराने-धमकाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

हर संदेश छोड़ता है डिजिटल सबूत

ऑपरेशन से जुड़े एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, हर कॉल और हर संदेश कोई न कोई डिजिटल सबूत छोड़ता है। हमारा काम इन कड़ियों को जोड़कर अपराध को होने से पहले रोकना है। इस रणनीति से पहले ही कई योजनाबद्ध हमलों को नाकाम किया जा चुका है।

पुलिस ने पिस्तौल और कारतूस बरामद किए

एक मामले में पुलिस द्वारा एकत्र की गई खुफिया जानकारी के आधार पर विदेश में बैठे एक गैंगस्टर से जुड़े दो सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया, जिन्हें पंजाब में एक टारगेट किलिंग का जिम्मा सौंपा गया था। सूचना मिलने पर पुलिस टीमों ने हमला होने से पहले ही दोनों संदिग्धों को घेर लिया और उनके पास से एक पिस्तौल और कारतूस बरामद किए।

डिजिटल निगरानी के परिणामस्वरूप हो सकीं संभव

ये गिरफ्तारियां डिजिटल निगरानी के परिणामस्वरूप संभव हो सकीं, जिसके जरिए गिरोह के संचालकों और स्थानीय सहयोगियों के बीच हो रही बातचीत को ट्रैक किया गया। जांचकर्ताओं के अनुसार यह गैंगों के बीच संचार का एक आम तरीका है।

विशेष इकाइयों का किया विस्तार

पंजाब पुलिस ने संगठित अपराध से निपटने के लिए विशेष इकाइयों का भी विस्तार किया है। एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स (ए जी टी एफ ) अब राज्यव्यापी अधिकार क्षेत्र के साथ काम कर रही है। इसका अपना समर्पित पुलिस स्टेशन और विशेष बल है, जिससे इसे जिला सीमाओं की बाधाओं के बिना जांच करने में सुविधा मिलती है।

वित्तीय लेन-देन और यात्रा पैटर्न का विश्लेषण

इन इकाइयों में विश्लेषक उसी तरह आपराधिक नेटवर्क की निगरानी करते हैं जैसे खुफिया एजेंसियां सुरक्षा खतरों को ट्रैक करती हैं। कॉल डेटा रिकॉर्ड, वित्तीय लेन-देन और यात्रा पैटर्न का विश्लेषण कर गिरोह के सदस्यों, फंडिंग स्रोतों और उनके सहयोगियों के बीच संबंधों की पहचान की जाती है।

आपराधिक गतिविधियों को करते हैं संचालित

इन प्रयासों का दायरा भारत की सीमाओं से बाहर तक फैला हुआ है। पुलिस के अनुमान के अनुसार पंजाब से जुड़े लगभग 60 गैंगस्टर इस समय विदेशों, खासकर कनाडा और अमेरिका जैसे देशों में बैठे हैं और वहीं से स्थानीय नेटवर्क के जरिए आपराधिक गतिविधियों को संचालित करते हैं।

निगरानी और उनकी प्रत्यर्पण प्रक्रिया

ऐसे नेटवर्क को ट्रैक करने के लिए केंद्रीय एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ समन्वय आवश्यक होता है। विदेशों में बैठे इन अपराधियों की निगरानी और उनकी प्रत्यर्पण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए पंजाब पुलिस ने फ्यूजिटिव ट्रैकिंग सेल भी स्थापित किए हैं।

अपराधों के बारे में सुराग

तकनीक के साथ-साथ पारंपरिक पुलिसिंग तरीके भी उतने ही महत्वपूर्ण बने हुए हैं। मुखबिरों का नेटवर्क और गुप्त सूचना देने वाले स्रोत संभावित अपराधों के बारे में पहले ही सुराग दे देते हैं। पंजाब पुलिस ने एक विशेष हेल्पलाइन भी शुरू की है, जिसके जरिए नागरिक गुप्त रूप से गैंगस्टर गतिविधियों की जानकारी दे सकते हैं, ताकि यह सूचना सीधे एंटी-गैंगस्टर यूनिट्स तक पहुंच सके।

लक्ष्य अपराध से पहले ही शूटरों की पहचान

खुफिया जानकारी और डिजिटल विश्लेषण के इस संयोजन ने राज्य में पुलिसिंग की परिभाषा को बदलना शुरू कर दिया है। अपराध होने के बाद कार्रवाई करने की बजाय अब लक्ष्य अपराध से पहले ही शूटरों की पहचान कर उन्हें रोकना है।
राज्य के अपराध निगरानी केंद्रों में काम कर रहे अधिकारियों का उद्देश्य स्पष्ट है- अपराधी नेटवर्क के अगले कदम का पहले ही अनुमान लगाकर उसे विफल करना।

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