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तीन साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या मामले में कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, अब फांसी पर झूलेगा आरोपी

MP News : मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में साल 2023 में हुई तीन वर्षीय मासूम से रेप और हत्या के मामले में आरोपी को ऐसी सजा मिली है जो ऐसी क्रूरता के खिलाफ रहने वाला हर व्यक्ति चाहता है। मामले में बुढ़ार की विशेष न्यायालय (पॉक्सो) ने ऐसी दरिंदगी करने वाले आरोपी को उम्रकैद, आजीवन कारावास या कोई अन्य सजा नहीं बल्कि मौत की सजा सुनाई है।

इस मामले को निर्भया जैसा वीभत्स करार देते हुए कोर्ट ने गुरुवार को आरोपी भानू उर्फ रामनारायण ढीमर को फांसी की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषी का साथ देने वाली उसकी पत्नी पिंकी ढीमर व राजकुमार बर्मन को चार-चार साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। सजा सुनाते हुए न्यायधीश सुशील कुमार अग्रवाल ने कहा कि, जो बच्ची ठीक से बोल भी नहीं सकती उसके साथ ऐसी दरिंदगी करने वाले अपराधियों को जिंदा रहने का कोई अधिकार नहीं है।

साल 2023 का है मामला

दरअसल, ये मामला शहडोल के खैरहा थाना क्षेत्र की है, जहां साल 2023 में आरोपी भानू उर्फ रामनारायण ढीमर ने तीन वर्षीय बच्ची के साथ हैवानियत की थी। आरोपी ने इस घटना को अंजाम तब दिया जब बच्ची की मां घर में बिस्तर पर सुलाकर मोहल्ले में आयोजित शादी समारोह में गई थी। उस दौरान घर में बच्ची के पिता का दोस्त आरोपी भानू उर्फ रामनारायण ढीमर मौजूद था। मां उसी के भरोसे बच्ची को घर में अकेला छोड़कर चली गई थी। क्योंकि वो महिला के पति का दोस्त था और हमेशा घर में उसका आना-जाना लगा रहता था।

धमकी मिलने पर मां ने छुपाया था सच

वहीं महिला जब रात करीब 11 बजे वापस लौटी तो उसने देखा कि उसकी तीन वर्षीय बेटी शिवांगनी जमीन पर बेहोश पड़ी हुई है। बच्ची के चेहरे गले पर चोट के निशान भी थे। जब महिला ने आरोपी से पूछा तो पाया कि वह नशे में था और बताया कि वह रो रही थी तो उसने थप्पड़ मार दिए जिससे उसको चोट लग गई। महिला ने जब आरोपी से पुलिस में रिपोर्ट कराने की बात कही तो वह गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी देने लगा। कहा कि अगर कभी भी इसके बारे में पुलिस को बताया तो पूरे परिवार को जान से मार देगा। इसीलिए महिला ने पुलिस को कुछ भी सच नहीं बताया।

7 मार्च को हुई थी बच्ची की मौत

जब बच्ची की हालत बिगड़ने लगी तो उसे बुढार अस्पताल ले जाया गया जहां से उसे मेडिकल कॉलेज शहडोल रेफर कर दिया गया। इस दौरान बच्ची की हालत बेहद गंभीर थी और उसे वेंटिलेटर पर रखा गया था। इलाज के दौरान 7 मार्च 2023 को मासूम की मौत हो गई। इसके बाद पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और मेडिकल जांच में सामने आया कि बच्ची के साथ रेप किया गया था। इसके बाद पुलिस ने हत्या, रेप और पॉक्सो एक्ट की धाराएं बढ़ाईं। जांच के दौरान डीएनए परीक्षण कराया गया, जिससे आरोपी की हैवानियत की पुष्टि हुई। इसके बाद कोर्ट में केस की सुनवाई हुई।

मेडिकल कॉलेज के फॉरेंसिक एक्सपर्ट प्रोफेसर बने अहम गवाह

मामले में कोर्ट द्वारा सुनाए गए फैसले की पूरी जानकारी देते हुए एडीपीओ संतोष कुमार पाटले ने बताया कि इस मामले की मुख्य और अहम गवार मेडिकल कॉलेज के फॉरेंसिक एक्सपर्ट प्रोफेसर पवन वानखेड़े रहे। क्योंकि उन्होंने ही बताया कि मासूम की मौत के बाद जब पोस्टमॉर्टम हुआ, तो रेप का सच सामने आया। प्रोफेसर वानखेड़े ने स्पष्ट किया कि मासूम के जननांग में पुरुष के लिंग से चोट पहुंची है।

हालांकि आरोपी के पक्ष में लड़ रहे वकील ने दलील दी कि किसी अन्य वस्तु या अंग से भी चोट पहुंच सकती है, लेकिन प्रोफेसर ने साक्ष्यों और तर्कों के साथ यह साबित किया कि मासूम के साथ रेप हुआ है। उनके इस बयान को कोर्ट ने गंभीरता से लिया और इसी आधार पर मुख्य आरोपी को पॉक्सो एक्ट के तहत मौत की सजा सुनाई।

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