Chhattisgarh : छत्तीसगढ़ में धान खरीदी और भंडारण व्यवस्था में सूखत और कीट-जनित क्षति को लेकर कुछ स्थानों पर भ्रम फैलाया जा रहा है। सरकार ने इसे लेकर स्पष्ट किया है कि यह भ्रम तथ्यों के विपरीत है।
वास्तविक स्थिति यह है कि धान भंडारण के दौरान नमी में कमी के कारण वजन में आंशिक गिरावट (सूखत) एक स्वाभाविक और तकनीकी प्रक्रिया है, जो पिछले कई वर्षों से जारी है। यह प्रक्रिया सिर्फ छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश के सभी धान उत्पादक राज्यों में देखी जाती है।
किसानों को न हो कोई परेशानी
सरकार ने यह भी बताया कि धान के भंडारण में कीटों, जैसे चूहों आदि से होने वाले नुकसान को लेकर भी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे किसानों को कोई परेशानी न हो। इस विषय में उठाए गए कदमों की वजह से धान की खरीदी प्रक्रिया को सुरक्षित और सुचारू रूप से संचालित किया जा रहा है।
अचानक उत्पन्न होने वाली स्थिति नहीं
सरकारी अभिलेखों के अनुसार, खरीफ विपणन वर्ष 2019-20 में धान में 6.32 प्रतिशत और 2020-21 में 4.17 प्रतिशत सूखत दर्ज की गई थी। ये आंकड़े साफ तौर पर यह बताते हैं कि सूखत कोई नई या अचानक उत्पन्न होने वाली स्थिति नहीं है, बल्कि यह एक निरंतर चलने वाली भौतिक-तकनीकी प्रक्रिया है, जो वर्षों से हो रही है।
मापा और पारदर्शी बनाया…
धान संग्रहण केंद्रों में नमी, तापमान, भंडारण अवधि, परिवहन और वातावरण के प्रभाव से धान का वजन कुछ प्रतिशत घट जाता है। इसे वैज्ञानिक रूप से “मॉइस्चर लॉस” या “ड्रायिंग लॉस” कहा जाता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से खत्म नहीं की जा सकती, लेकिन इसे नियंत्रित, मापा और पारदर्शी बनाया जा सकता है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में धान में लगभग 3.49 प्रतिशत सूखत की संभावना व्यक्त की गई है, जो पिछले वर्षों के औसत के अनुरूप है और यह असामान्य नहीं है।
निगरानी जैसी व्यवस्थाएं लागू
वर्तमान धान खरीदी व्यवस्था में कई सुधार किए गए हैं, ताकि किसानों को उनके धान का सही मूल्य मिले और भंडारण में किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो। अब धान संग्रहण केंद्रों पर डिजिटल स्टॉक एंट्री, वजन सत्यापन, गुणवत्ता परीक्षण, गोदाम ट्रैकिंग, परिवहन और उठाव की निगरानी जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई हैं। इन उपायों से किसी भी स्तर पर होने वाली अनियमितताओं को तुरंत पहचाना जा सकता है।
बन चुकी है ट्रैक-योग्य प्रक्रिया
इसके अलावा, सूखत अब केवल एक अनुमान नहीं, बल्कि एक डेटा-आधारित और ट्रैक-योग्य प्रक्रिया बन चुकी है। जहां सूखत प्राकृतिक सीमा के भीतर रहती है, उसे सामान्य माना जाता है, और जहां यह असामान्य रूप से अधिक होती है, वहां जांच की जाती है और जवाबदेही तय की जाती है।
विश्वसनीय और पारदर्शी प्रक्रिया
धान खरीदी व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को उनके धान का पूरा और न्यायसंगत मूल्य मिले, और भंडारण प्रक्रिया पूरी तरह से विश्वसनीय और पारदर्शी बनी रहे।
किसानों का विश्वास हुआ मजबूत
आज प्रदेश की धान खरीदी प्रणाली डिजिटल टोकन, ऑनलाइन भुगतान, स्टॉक ट्रैकिंग और शिकायत निवारण जैसी सुविधाओं के साथ देश की सबसे संगठित और निगरानी-आधारित व्यवस्थाओं में शामिल हो चुकी है। इस प्रणाली से किसानों का विश्वास मजबूत हुआ है और पूरी प्रक्रिया में जवाबदेही बढ़ी है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सूखत अब एक वैज्ञानिक वास्तविकता है, जिसे पूरी पारदर्शिता, निगरानी और नियंत्रण के साथ संचालित किया जा रहा है।
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