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उत्तराखंड में मार्च की असामान्य बर्फबारी, जलवायु परिवर्तन और पश्चिमी विक्षोभ का असर

Weather Update : मार्च के महीने में पहाड़ों पर हुई ताज़ा बर्फबारी ने मौसम के पारंपरिक पैटर्न पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर इस समय तक सर्दी ढलान पर होती है, लेकिन इस साल मौसम ने अलग ही संकेत दिए हैं। वैज्ञानिक इसे केवल एक असामान्य घटना नहीं, बल्कि बदलते जलवायु चक्र का हिस्सा मान रहे हैं।

जलवायु परिवर्तन से बदल रहा मौसम चक्र

विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर बढ़ते जलवायु परिवर्तन का असर अब साफ तौर पर मौसम के व्यवहार में दिखाई देने लगा है। सर्दी और गर्मी के बीच का संतुलन बिगड़ रहा है, जिसके चलते मार्च जैसे महीनों में भी बर्फबारी जैसी घटनाएं देखने को मिल रही हैं। पिछले 26 वर्षों में यह चौथी बार है जब मार्च में इस तरह की बर्फबारी दर्ज की गई है।

पश्चिमी विक्षोभ की बढ़ती सक्रियता बनी वजह

मौसम वैज्ञानिक इस बदलाव के पीछे पश्चिमी विक्षोभ की बढ़ती सक्रियता को एक बड़ा कारण मानते हैं। ये विक्षोभ भूमध्यसागर क्षेत्र से नमी लेकर हिमालय की ओर बढ़ते हैं और टकराने पर बारिश या बर्फबारी का कारण बनते हैं। हाल के दिनों में इनकी लगातार सक्रियता ने पहाड़ी इलाकों में ठंडक और नमी बनाए रखी, जिससे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी संभव हो सकी।

मिश्रित प्रभाव: राहत भी, चिंता भी

इस असामान्य बर्फबारी के प्रभाव भी बहुआयामी हो सकते हैं। एक ओर जहां मैदानी इलाकों में तापमान में गिरावट दर्ज हो सकती है और गर्मी की शुरुआत में देरी हो सकती है, वहीं दूसरी ओर यह जल संसाधनों के लिए फायदेमंद भी साबित हो सकती है। बर्फ के पिघलने से नदियों का जलस्तर बढ़ेगा, जिससे पानी की उपलब्धता बेहतर हो सकती है।

कृषि क्षेत्र के लिए बढ़ी चिंता

हालांकि, इसका दूसरा पहलू कृषि क्षेत्र के लिए चिंता पैदा करता है। बेमौसम ठंड और नमी फसलों को नुकसान पहुंचा सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां खेती मौसम के पारंपरिक चक्र पर निर्भर करती है। विशेषज्ञ किसानों को सतर्क रहने और आवश्यक एहतियात बरतने की सलाह दे रहे हैं।

आंकड़े भी दे रहे बदलाव का संकेत

अगर पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो 2012, 2014 और 2020 में भी मार्च में बर्फबारी दर्ज की गई थी। इस बार 2026 में फिर ऐसी स्थिति सामने आई है, लेकिन खास बात यह है कि इस बार बर्फबारी 3000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हुई है, जो इसे और भी अलग बनाती है।

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