Attacks On Neighboring Countries : इजरायल-अमेरिका ने ईरान पर शनिवार को एक बड़ा हमला किया. इस हमले में देश के सर्वोंच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई. दोनों देशों के संयुक्त हमले में ईरान के और भी कई लोगों की मौत हो गई. इन हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की है और लगातार अपने पड़ोसी देशों को निशाना बना रहा है और ऐसे देशों की संख्या कोई एक या दो नहीं, बल्कि पूरी नौ है. इन देशों में इजरायल से लेकर बहरीन, कतर, साइप्रस, यूएई, सऊदी अरब, कुवैत, जॉर्डन और इराक तक शामिल हैं. इस तरह ये जंग अब सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे इलाके में फैल गई है.
अब सवाल ये है कि आखिर हमला जब अमेरिका-इजरायल ने किया है, तो हमले और देशों पर क्यों हो रहे हैं? आखिर इसके पीछे की वजह क्या है? आइए, जानते हैं.
अपने आसपास कुल 9 देशों पर हमले किए
आपको बता दें कि अमेरिका और इजरायल के साथ जंग लड़ रहे ईरान ने अपने आसपास कुल 9 देशों पर हमले किए हैं. ईरान ने इन देशों में स्थित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है. जिन 9 देशों में ईरान की मिसाइलों और ड्रोन्स ने तबाही मचाई है उनके नाम हैं.
यूएई (खासकर दुबई), कतर, बहरीन, सऊदी अरब, कुवैत, जॉर्डन, इराक,साइप्रस हैं.
हमलों के जवाब में ईरान ने ये हमले क्यों किए
इन देशों पर ईरान ने ऐसे ही हमले नहीं किए हैं, बल्कि यह एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है. इन हमलों के जरिये ईरान आर्थिक, सैन्य और भौगोलिक कारकों सहित कई स्तरों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है. अब हम आपको एक-एक करके बताएंगे कि अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों के जवाब में ईरान ने ये हमले क्यों किए.
संयुक्त अरब अमीरात और खासकर दुबई ईरान का सीधा सैन्य लक्ष्य नहीं, बल्कि गल्फ का बड़ा आर्थिक-व्यापारिक हब है. ईरान यहां हमला जमीन पर कब्जे के लिए नहीं, बल्कि भरोसा डगमगाने और बाजार, बीमा व शिपिंग पर असर डालकर दुश्मनों की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के लिए करता है.
कतर में अल उदीद एयर बेस पर हमले
ईरान ने कतर में स्थित अल उदीद एयर बेस पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जो मिडिल ईस्ट में अमेरिका का अहम सैन्य ठिकाना है. कतर का कहना है कि उसने कई मिसाइलें हवा में ही गिरा दीं, जबकि ईरान का मकसद साफ संदेश देना है कि जंग सिर्फ एक मोर्चे तक सीमित नहीं रहेगी.
वहीं, बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा के बेस पर ईरान ने मिसाइलें दागीं, लेकिन किसी बड़े नुकसान की पुष्टि अभी तक नहीं हुई है. यह हमला खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ी समुद्री सुरक्षा से जुड़ा है, क्योंकि इसी रास्ते से दुनिया के बड़े हिस्से का तेल व्यापार गुजरता है और यहां अस्थिरता की खबर से ही तेल कीमतें बढ़ जाती हैं.
साइप्रस पर हमला और रणनीतिक संदेश
ईरान तीन मोर्चों पर दबाव बना रहा है. आर्थिक दबाव दुबई से, हवाई चुनौती कतर में और समुद्री दबाव बहरीन के जरिए. इसके साथ ही सऊदी अरब, कुवैत, जॉर्डन और इराक में हमलों से मामला और आगे बढ़ गया है. जहां सऊदी अरब और कुवैत के ऊर्जा ठिकाने तेल उत्पादन पर असर डाल सकते हैं, जबकि जॉर्डन और इराक रणनीतिक बफर जोन हैं.
साइप्रस पर हमला और अंतरराष्ट्रीय संदेश
ईरान के हालिया हमलों में साइप्रस भी शामिल है, जहां ब्रिटेन के नियंत्रण वाले सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया. इससे साफ है कि संघर्ष अब खाड़ी तक सीमित नहीं रहा और ईरान अपनी पहुंच व ताकत दिखाकर यूरोप और पश्चिमी ताकतों को भी संदेश दे रहा है.
ईरान की यह रणनीति जोखिम भरी है. दबाव से देश बंटने के बजाय उलटा असर हो सकता है, क्योंकि खाड़ी देशों ने अपने एयर डिफेंस और आपसी तालमेल को मजबूत किया है. ऐसे में ईरान जिस कमजोरी की उम्मीद कर रहा है, उसकी जगह ये देश और ज़्यादा एकजुट हो सकते हैं.
संकट और संयम का खतरा
अब सवाल यह है कि आगे जंग किस दिशा में जाएगी? फिलहाल इसके तीन संभावित रास्ते नजर आ रहे हैं. फिलहाल हमले जारी हैं, लेकिन ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर से पहले तक सभी पक्ष सीमित दायरे में रहने की कोशिश कर रहे थे. अब जैसे-जैसे टकराव फैल रहा है, संयम टूटने का खतरा बढ़ रहा है और एक छोटी गलती भी बड़े संघर्ष में बदल सकती है.
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