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Greenland Protest : ग्रीनलैंड में Trump के खिलाफ सड़कों पर उतरे लोग, एग्रीमेंट रोकने की तैयारी में EU

Greenland Protest : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ ग्रीनलैंड के लोग सड़कों पर उतर आए हैं। लोगों ने ट्रंप सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। ट्रंप के ग्रीनलैंड को खरीदने या कब्जाने पर लोगों में आक्रोश है। बता दें कि ट्रंप की जबरदस्ती से परेशान होकर नाटो और यूरोपीय देश भी एकजुट हैं। राजधानी नुउक में लोगों के जमावड़े की वीडियो फोटो सामने आए हैं।

एक-चौथाई आबादी सड़कों पर एकजुट

दरअसल यह आक्रोश ट्रंप के ग्रीनलैंड को कब्जाने वाले बयान पर है। प्रदर्शनकारियों ने ‘ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं है’ के नारे लगाए। बर्फीली सड़कों से प्रदर्शनकारी राजधानी नुउक के डाउनटाउन से अमेरिकी वाणिज्य दूतावास तक पहुंचे। उन्होंने राष्ट्रीय झंडे लहराए और विरोधी पोस्टर हाथों में लेकर जमकर विरोध किया। ग्रीनलैंड में यह अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन है। राजधानी नुउक में इस समय एक-चौथाई के आसपास की आबादी सड़कों पर एकजुट है।

विरोध करने वालों पर 10% टैरिफ

यूरोपीय संघ (EU) के सांसद अमेरिका से हुए ट्रेड एग्रीमेंट की मंजूरी रोकने की तैयारी कर रहे हैं। यूरोपियन पीपुल्स पार्टी (EPP) के अध्यक्ष मैनफ्रेड वेबर ने कहा कि ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकियों के कारण अब इस समझौते को मंजूरी देना मुश्किल है। वहीं, अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर अमेरिका के कब्जे की धमकी का विरोध कर रहे यूरोप के 8 देशों पर 10% टैरिफ लगाने का ऐलान किया। इससे ग्रीनलैंड के लोगों में ट्रंप के खिलाफ गुस्सा और बढ़ गया है।

अमेरिका में हो रहा ट्रंप का विरोध

इस विवाद में यूरोप के बड़े देश भी शामिल हो गए हैं। फ्रांस, जर्मनी और नॉर्वे जैसे देशों ने सपोर्ट करते हुए सैन्य टुकड़ियां ग्रीनलैंड भेजी हैं, जिसे वे ‘सर्च मिशन’ बता रहे हैं। वहीं, अमेरिका के अंदर भी ट्रंप का विरोध शुरू हो गया है।

अमेरिकी कांग्रेस का एक डेलिगेशन, जिसमें डेमोक्रेटिक सीनेटर क्रिस कून्स भी शामिल हैं, उन्होंने ट्रंप की भाषा को ‘गलत’ बताया है। हालांकि, यूएन में अमेरिकी एंबेसडर माइक वाल्ट्ज का तर्क है कि डेनमार्क के पास इतने संसाधन नहीं हैं कि वह अकेले ग्रीनलैंड को संभाल सके, इसलिए अमेरिका का वहां होना सबके हित में है।

अमेरिका इसलिए चाहता है कब्जा

बता दें कि ग्रीनलैंड अमेरिका और यूरोप के बॉर्डर पर बसा देश है, जिसका ज्यादातर हिस्सा अमेरिका से लगता है, लेकिन वर्ष 1700 से ग्रीनलैंड पर डेनमार्क का कब्जा है। वहीं इसके एक तरफ रूस है, जो आर्कटिक के रास्ते ग्रीनलैंड होते हुए चीन तक अपने कच्चे तेल की सप्लाई करता है।

क्योंकि ग्रीनलैंड के आस-पास रूस और चीन की गतिविधियां बढ़ गई हैं, जिससे अमेरिका चिंतित है। ग्रीनलैंड कई खनिज पदार्थों और रेयर अर्थ एलिमेंट्स का भंडार है तो अमेरिका नहीं चाहता कि इस देश पर रूस या चीन कब्जा करें।

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