Biharराज्य

Bihar: भागलपुर में सरकारी स्कूल में पढ़ा रही पाकिस्तानी महिला, दस्तावेज जांच में बड़ा खुलासा

Bihar Voter List Fraud : बिहार के भागलपुर जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण SIR के दौरान एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. दो ऐसी महिलाओं के नाम मतदाता सूची में दर्ज पाए गए हैं जो भारत की नागरिक नहीं हैं. इनमें एक महिला पाकिस्तान से आई बताई जा रही है जो वर्तमान में सरकारी स्कूल में शिक्षिका के पद पर कार्यरत है. दूसरी महिला का संबंध बांग्लादेश से है.

पाकिस्तानी मूल की महिला सरकारी नौकरी में

पहला मामला इमराना खानम उर्फ इमराना खातून का है. जांच में सामने आया कि इमराना पाकिस्तान की नागरिक हैं, लेकिन पिछले 13 वर्षों से भागलपुर के एक सरकारी उर्दू मिडिल स्कूल में शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं. उनकी नियुक्ति 31 जनवरी 2012 को हुई थी और वे 2013 से नारायणपुर प्रखंड में तैनात हैं.

इमराना के पास वोटर कार्ड और EPIC नंबर मौजूद है. उनके कार्ड में पति का नाम इब्तुल हसन लिखा है. गृह विभाग से सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन ने फॉर्म-7 भरवाकर उनका नाम वोटर लिस्ट से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

दस्तावेजों में गड़बड़ियां उजागर

जांच में यह भी सामने आया कि इमराना के दस्तावेजों में कई विसंगतियां हैं. वोटर कार्ड में पिता का नाम ‘मोहम्मद इबमूल हसन’ दर्ज है जबकि शैक्षणिक और विभागीय दस्तावेजों में यह नाम ‘मोहम्मद मूसा’ बताया गया है. इसी तरह माता का नाम भी अलग-अलग रिकॉर्ड में भिन्न पाया गया.

दूसरा मामला बांग्लादेश से जुड़ा

फिरदौसिया खानम नाम की 80 वर्षीय महिला का मामला भी सामने आया है. वे मूल रूप से रंगपुर की रहने वाली हैं जो पहले पूर्वी पाकिस्तान और अब बांग्लादेश का हिस्सा है. दस्तावेजों के अनुसार वे 19 जनवरी 1956 को तीन महीने के वीजा पर भारत आई थीं. बावजूद इसके उनका नाम भारतीय मतदाता सूची में दर्ज है. उनके वोटर कार्ड में पति का नाम मोहम्मद तफजील अहमद दर्ज है. वर्तमान में वे गृहिणी हैं. प्रशासन ने उनके बेटे को नोटिस जारी कर पासपोर्ट, वीजा और नागरिकता से जुड़े मूल दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है.

प्रशासन की कार्रवाई तेज

भागलपुर के जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने बताया कि दोनों महिलाओं के मामले में कार्रवाई की जा रही है. उन्हें दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया है और वेरिफिकेशन के बाद उनका नाम वोटर लिस्ट से हटाया जाएगा.

इस मामले की पुष्टि बूथ लेवल ऑफिसर फरजाना खानम ने भी की है. वे SIR अभियान के दौरान जांच कर रही थीं. उन्होंने बताया कि गृह विभाग से प्राप्त दस्तावेजों में विदेशी पते और पुराने वीजा की पुष्टि हुई है. इसी आधार पर उन्होंने दोनों नाम हटाने की अनुशंसा की.

शिक्षा विभाग में हलचल

इमराना का मामला केवल मतदाता सूची तक सीमित नहीं रहा. अब सवाल उठ रहा है कि अगर वे विदेशी नागरिक हैं तो उन्हें सरकारी शिक्षिका की नौकरी कैसे मिल गई. वर्षों से बिना किसी जांच के उनका नाम और पद दोनों मान्य कैसे बने रहे, यह जांच का विषय बन गया है. शिक्षा विभाग में इस खुलासे के बाद हड़कंप मच गया है.

यह भी पढ़ें : बिना सिस्टम के विकास शुल्क वसूली, इंदौर में 150 कॉलोनियां बनीं सिरदर्द

Hindi Khabar App: देश, राजनीति, टेक, बॉलीवुड, राष्ट्र,  बिज़नेस, ज्योतिष, धर्म-कर्म, खेल, ऑटो से जुड़ी ख़बरों को मोबाइल पर पढ़ने के लिए हमारे ऐप को प्ले स्टोर से डाउनलोड कीजिए. हिन्दी ख़बर ऐप

Related Articles

Back to top button