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हथियार डाल दें नहीं तो भुगतने होंगे गंभीर परिणाम, व्हाइट हाउस से ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी

Middle East Crisis : पश्चिम एशिया में आज सातवें दिन भी युद्ध बरकरार है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव कम होने के बजाय बढ़ता ही जा रहा है। इस दौरान ईरान में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है, और अभी भी मौत का तांडव जारी है। वहीं इजरायल और अमेरिका पर भी इस युद्ध का असर पड़ा है। हालांकि अभी भी इस संघर्ष के थमने का कोई आसार नहीं दिख रहा है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर इस संघर्ष को लेकर सख्त संकेत दिए हैं। उन्होंने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड, सेना और पुलिस को हथियार डालने के लिए कड़ी चेतावनी दी है।

ट्रंप ने दी हथियार डालने की चेतावनी

व्हाइट हाउस में दिए गए अपने बयान में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड, सेना और पुलिस को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका और उसके सहयोगियों के खिलाफ किसी भी खतरे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

ईरान की मौजूदा सत्ता व्यवस्था पर ट्रंप का कड़ा रुख

ट्रंप ने ईरान की मौजूदा सत्ता व्यवस्था पर भी कड़ा रुख अपनाते हुए संकेत दिया कि भविष्य में जो भी नेतृत्व सामने आए, वह अमेरिका या उसके पड़ोसी देशों के लिए खतरा नहीं होना चाहिए। उन्होंने ईरानी राजनयिकों से भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षित विकल्पों पर विचार करने की सलाह दी और कहा कि अमेरिका क्षेत्र में स्थिरता और नई दिशा के लिए सहयोग करने को तैयार है।

ईरान की नौसेना के कई जहाजों को नुकसान

अपने संबोधन में ट्रंप ने अमेरिकी और इस्राइली सैन्य कार्रवाइयों का उल्लेख करते हुए दावा किया कि ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के दिनों में ईरान की नौसेना के कई जहाजों को नुकसान पहुंचा है और उसकी वायु रक्षा प्रणाली कमजोर हुई है। ट्रंप के अनुसार, ईरानी नेतृत्व को मौजूदा हालात को गंभीरता से समझने की आवश्यकता है।

ईरान के भविष्य पर ट्रंप ने रखी अपनी राय

इसके साथ ही ट्रंप ने ईरान के भविष्य के नेतृत्व को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि देश में ऐसा नेतृत्व होना चाहिए जो शांति और स्थिरता स्थापित कर सके। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पुराने और कठोर विचारों वाले नेताओं को आगे लाया गया, तो क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है। उन्होंने संकेत दिया कि क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भूमिका आवश्यक हो सकती है।

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