
Harsha Richhariya : प्रयागराज में लगे महाकुंभ 2025 में वायरल हुई हर्षा रिछारिया ने अब धर्म को छोड़ने का फैसला लिया है। मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया ने खुद इस बात की पुष्टि की है कि वह अब साध्वी का रूप छोड़ना चाहती हैं। हालांकि इस फैसले के लिए उन्होंने धार्मिक समुदाय के कुछ लोगों को ही दोषी ठहराया है।
धार्मिक समुदाय के लोगों पर आरोप
हर्षा रिछारिया ने कहा कि, धार्मिक समुदाय में कुछ लोग ऐसे होते हैं जो उसी धर्म के दूसरे लोगों को दुख पहुंचाते हैं, और इसी वजह से हमारा विश्वास बहुत गहरा आहत होता है, इस हद तक कि जो कुछ भी हो रहा है उससे हमें दुख होता है। हर्षा ने बताया कि पिछले डेढ़ साल में उन्हें जिस तरह के मानसिक तनाव से गुजरना पड़ा, उसने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया है।
हर्षा का कहना है कि जब धर्म गुरु ही एक अकेली लड़की के विरोध में खड़े हो जाएं तो लड़ना नामुमकिन हो जाता है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, मैं सीता माता नहीं हूं कि बार-बार अग्नि परीक्षा देती रहूं। एक साल में मैंने जितनी परीक्षाएं दी हैं, अब उन्हें विराम देने का समय आ गया।
शांति से ज्यादा कलेश है
हर्षा रिछारिया ने ये भी स्पष्ट किया कि उनका सनातन धर्म के प्रति विश्वास में कोई कमी नहीं आई है। मैं हिंदू धर्म में पैदा होने पर गर्व महसूस करती हूं और इसे कभी नहीं छोडूंगी। लेकिन मैं जो सोच कर आई थी कि यहां शांति मिलेगी, वो नहीं है। उन्होंने कहा कि वह अब धर्म के खुले प्रचार-प्रसार से खुद को अलग कर रही हैं क्योंकि यहां शांति की जगह क्लेश ज्यादा है।
अपने पुराने प्रोफेसन पर गर्व
ग्लैमर की दुनिया छोड़कर धर्म के मार्ग पर चलने वाली हर्षा ने अपने पुराने प्रोफेसन पर गर्व जताते हुए कहा कि ‘मैं यह बहुत गर्व से कहती हूं, मैं एक एंकर थी, मैं एक एक्टर थी, और मैंने वह काम बहुत गर्व से किया। उसी पेशे ने सबसे पहले हर्षा रिछारिया को हर्षा रिछारिया के रूप में पहचान दी। लेकिन फिर मैंने धर्म का रास्ता चुना और धर्म को बढ़ावा देने और फैलाने के लिए आगे बढ़ी। कई युवा सभी पहलुओं में मुझसे जुड़े। लेकिन आखिर में अपने ही लोगों के कारण मुझे इस मार्ग को छोड़ने का फैसला लेना पड़ रहा है।
हर्षा रिछारिया ने किया नर्मदा नदी में पवित्र स्नान
बता दें कि मकर संक्रांति पर हर्षा रिछारिया ने मध्य प्रदेश स्थित जबलपुर में नर्मदा नदी में पवित्र स्नान किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि ‘मुझे बहुत अच्छा लग रहा है क्योंकि मेरा संस्कारधानी जबलपुर और मां नर्मदा से बहुत पुराना और गहरा रिश्ता है। इसलिए आज, अगर मुझे इस पवित्र मौके पर मां नर्मदा के किनारे आने और पवित्र स्नान करने का सौभाग्य मिला है, तो यह मेरे लिए बहुत बड़े आशीर्वाद और सौभाग्य की बात है।’
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