Independence Day 2026 : देश आज आजादी की 80वीं वर्षगांठ मना रहा है. लाल किले की प्राचीर पर तिरंगा शान से लहराया गया, लेकिन स्वतंत्रता दिवस समारोह में कांग्रेस के दो बड़े नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे नजर नहीं आए. दोनों नेताओं की ओर से समारोह में बैठने की व्यवस्था और तय प्रोटोकॉल को लेकर नाराजगी जताई गई है.
सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे समारोह के लाइनअप और बैठने की जगह को लेकर नाराज थे. बताया जा रहा है कि उन्हें लगा कि सीटिंग अरेंजमेंट उनके पद के मुताबिक नहीं था. इसी वजह से दोनों नेताओं ने कार्यक्रम से दूरी बना ली.
इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं. खास तौर पर इसलिए क्योंकि स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय समारोह में प्रोटोकॉल और सीटिंग अरेंजमेंट को लेकर पहले भी विवाद हो चुका है.
2024 में भी हुआ था विवाद
साल 2024 में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान भी विपक्ष ने सीटिंग अरेंजमेंट को लेकर सवाल उठाए थे. उस समय लोकसभा में नेता विपक्ष को पहली कतार की जगह पीछे बैठाया गया था. विपक्ष ने इसे जनता का अपमान बताया था. वहीं रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि ओलंपिक खिलाड़ियों को जगह देने के कारण बैठने की व्यवस्था में बदलाव किया गया था. नियमों के मुताबिक, राष्ट्रीय कार्यक्रमों में नेता विपक्ष के लिए पहली कतार में सीट तय होती है.
संसद के बाद बढ़ी थी तनातनी
हाल ही में संसद का मॉनसून सत्र खत्म हुआ है. पूरे सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर जोरदार टकराव देखने को मिला. सदन की कार्यवाही बाधित होने को लेकर दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए.
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से लगातार 13वीं बार तिरंगा फहराया, उन्होंने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं और कहा कि 140 करोड़ भारतीयों की ताकत से देश अलग-अलग क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है.
देश की सुरक्षा का भी किया जिक्र
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने विकास, युवाओं और देश की सुरक्षा समेत कई मुद्दों पर बात की, उन्होंने ‘दिमागी नक्सल’ का भी जिक्र किया. पीएम मोदी ने कहा कि बंदूक उठाने वाले नक्सली खत्म होने की कगार पर हैं, लेकिन ‘दिमागी नक्सल’ अब भी मौके की तलाश में हैं.
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे का स्वतंत्रता दिवस समारोह से दूर रहना ऐसे समय में हुआ है, जब संसद के मॉनसून सत्र के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक तनातनी बनी हुई है. ऐसे में इस घटनाक्रम ने सियासी चर्चाओं को और हवा दे दी है.
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