First Indian Flag : 15 अगस्त 1947 का दिन भारत के इतिहास में हमेशा के लिए दर्ज हो गया. लाल किले की प्राचीर से पंडित जवाहरलाल नेहरू ने तिरंगा फहराया और देश ने आजादी का जश्न मनाया. लेकिन इस ऐतिहासिक तिरंगे से जुड़ी एक ऐसी कहानी है, जिसके बारे में शायद बहुत कम लोग जानते हैं. आजाद भारत का पहला खादी तिरंगा राजस्थान के दौसा जिले के एक छोटे से गांव में बुना गया था.
आजादी से पहले देश को एक स्वदेशी झंडे की जरूरत थी. इसके लिए आलूदा गांव के चार बुनकर स्व. चौथमल महावर, शंभुदयाल, नानगराम और रेवड़मल आगे आए. चारों ने करीब दो महीने तक दिन-रात मेहनत कर सूती खादी का कपड़ा तैयार किया.
उस दौर में मशीनों की जगह चरखे और हथकरघे का इस्तेमाल होता था. हाथों से तैयार किया गया यह खादी कपड़ा पूरी तरह स्वदेशी था और गांधी जी के खादी आंदोलन की भावना को दर्शाता था.
गोविंदगढ़ में हुई तिरंगे की रंगाई
कपड़ा तैयार होने के बाद इसे तीन रंगों में रंगने के लिए राजस्थान के अलवर जिले के गोविंदगढ़ ले जाया गया. वहां राजस्थान के पहले मुख्यमंत्री स्व. हीरालाल शास्त्री और स्वतंत्रता सेनानी माणिक्यलाल वर्मा की देखरेख में इसकी रंगाई हुई.
कपड़े को केसरिया, सफेद और हरे रंग में रंगा गया. बीच में पहले चरखा लगाने की योजना थी, लेकिन बाद में उसकी जगह अशोक चक्र ने ले ली. रंगाई के बाद यही झंडा लेकर शास्त्री जी और वर्मा जी दिल्ली पहुंचे.
नेहरू ने लाल किले पर फहराया वही तिरंगा
15 अगस्त 1947 की सुबह पंडित जवाहरलाल नेहरू के हाथों में यही खादी का तिरंगा था, उन्होंने इसे लाल किले की प्राचीर से फहराया और दुनिया के सामने भारत की आजादी का ऐलान किया.
राजस्थान के एक छोटे से गांव के चार बुनकरों के हाथों से तैयार हुआ कपड़ा उस दिन इतिहास का हिस्सा बन गया. आलूदा गांव की यह कहानी आज भी उस दौर की स्वदेशी भावना और मेहनत की याद दिलाती है.
ये भी पढ़ें- E20 पेट्रोल, फ्लेक्स फ्यूल या EV कार? नई गाड़ी खरीदने से पहले जानें किसमें है ज्यादा फायदा
Hindi Khabar App: देश, राजनीति, टेक, बॉलीवुड, राष्ट्र, बिज़नेस, ज्योतिष, धर्म-कर्म, खेल, ऑटो से जुड़ी ख़बरों को मोबाइल पर पढ़ने के लिए हमारे ऐप को प्ले स्टोर से डाउनलोड कीजिए. हिन्दी ख़बर ऐप








