Haryana Revenue System : हरियाणा के कर एवं राजस्व को मजबूत करने को लेकर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की वित्तीय क्षमता बढ़ाने के लिए ऐसी व्यवस्था जरूरी है, जिसमें नागरिकों पर अतिरिक्त कर का बोझ डाले बिना राजस्व में वृद्धि की जा सके.
सम्मेलन में नीति निर्माता, कर प्रशासक, अर्थशास्त्री, शिक्षाविद और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ शामिल हुए. मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा विजन डॉक्यूमेंट 2047 में भी कर एवं राजस्व व्यवस्था को मजबूत बनाने का लक्ष्य रखा गया है.
SGST संग्रह में 29 प्रतिशत की वृद्धि
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2026-27 के पहले पांच महीनों में हरियाणा का SGST संग्रह 29 प्रतिशत बढ़कर 24,662 करोड़ रुपये हो गया है. पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 19,174 करोड़ रुपये था, उन्होंने कहा कि यह वृद्धि देश के सभी राज्यों में सबसे अधिक है और राष्ट्रीय औसत 16 प्रतिशत की तुलना में लगभग दोगुनी है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उद्योग और सेवा क्षेत्र हरियाणा की अर्थव्यवस्था का प्रमुख हिस्सा हैं. यही क्षेत्र प्रदेश के कर एवं राजस्व को बढ़ाने का बड़ा आधार भी हैं, उन्होंने कहा कि गन्नौर में बन रही इंडिया इंटरनेशनल हॉर्टिकल्चर मार्केट हब एंड स्पोक मॉडल पर आधारित है. वहीं गुरुग्राम ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के प्रमुख केंद्र के रूप में उभर चुका है, उन्होंने बताया कि पानीपत, करनाल और सोनीपत महत्वपूर्ण वैकल्पिक विकास क्षेत्रों के रूप में सामने आ रहे हैं, जबकि रेवाड़ी और अन्य औद्योगिक क्षेत्र लॉजिस्टिक्स, भंडारण और विनिर्माण क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं.
कर प्रशासन को आधुनिक बनाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कर प्रशासन को आधुनिक बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं. करदाताओं के साथ संवाद बेहतर करने के लिए नोटिस और आदेशों की उपलब्धता तथा सूचना पहुंचाने की व्यवस्था में सुधार किया गया है.
पुराने लंबित कर विवादों के समाधान के लिए हरियाणा एकबारगी व्यवस्थापन स्कीम 2026 लाई गई. वर्ष 2025 में शुरू की गई इस योजना का लाभ करीब 1 लाख 15 हजार व्यापारियों ने उठाया.
2047 तक 15 प्रतिशत कर राजस्व का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक कर राजस्व को 10 प्रतिशत और वर्ष 2047 तक 15 प्रतिशत तक पहुंचाने का है. सम्मेलन के पहले तकनीकी सत्र में कर राजस्व की मूल संरचना को मजबूत करने पर चर्चा हुई, जबकि दूसरा सत्र आंकड़ों के विश्लेषण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भविष्य के कर प्रशासन पर केंद्रित रहा.
मुख्यमंत्री ने कहा कि मजबूत राजस्व व्यवस्था का उद्देश्य जनता के जीवन में सुधार लाना है. बेहतर सार्वजनिक सेवाएं और बेहतर जीवन ही इसका अंतिम परिणाम होना चाहिए, उन्होंने उम्मीद जताई कि यह सम्मेलन हरियाणा की राजस्व व्यवस्था को अधिक मजबूत, आधुनिक, पारदर्शी और नागरिक केंद्रित बनाने के लिए कार्य योजना तैयार करने में मदद करेगा.
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