Auto News : भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर तेजी से बदल रहा है। सरकार ने देश में E20 पेट्रोल यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिला पेट्रोल को लागू कर दिया है। अब ज्यादातर पेट्रोल पंपों पर यही ईंधन उपलब्ध है। इसके अलावा फ्लेक्स फ्यूल व्हीकल्स के लिए E85 पेट्रोल भी लाया गया है, जिसमें 85 प्रतिशत इथेनॉल और 15 प्रतिशत पेट्रोल होता है।
E20 पेट्रोल को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं। कई ग्राहक इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि नई कार खरीदते समय पेट्रोल कार लें, फ्लेक्स फ्यूल कार खरीदें या फिर इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) का विकल्प चुनें। लोगों को यह चिंता भी है कि इथेनॉल मिले पेट्रोल से उनकी गाड़ी के इंजन पर असर पड़ेगा या नहीं।
तीनों विकल्पों में खर्च का अंतर
अगर कोई व्यक्ति साल में करीब 15 हजार किलोमीटर गाड़ी चलाता है और कार को 5 साल तक इस्तेमाल करता है, तो अलग-अलग विकल्पों का खर्च कुछ इस तरह हो सकता है।
पेट्रोल कार- शुरुआती कीमत कम, लेकिन ईंधन खर्च ज्यादा
मारुति सुजुकी वैगनआर जैसी पेट्रोल कार की कीमत करीब 5.96 लाख रुपये है। इसकी रनिंग कॉस्ट लगभग 4.49 रुपये प्रति किलोमीटर आती है। 15 हजार किलोमीटर सालाना चलाने पर पेट्रोल खर्च करीब 67,350 रुपये सालाना होगा। 5 साल में ईंधन पर लगभग 3.36 लाख रुपये खर्च होंगे। वहीं, मेंटेनेंस पर करीब 75 हजार रुपये का खर्च आ सकता है।
इस हिसाब से 5 साल में कार की कुल लागत करीब 10.08 लाख रुपये बैठती है। कम कीमत और देशभर में पेट्रोल पंपों की आसान उपलब्धता के कारण पेट्रोल कार अभी भी आम ग्राहकों के लिए सबसे आसान विकल्प बनी हुई है।
EV कार: चलाने का खर्च सबसे कम
टाटा टियागो EV जैसी इलेक्ट्रिक कार की कीमत करीब 9.49 लाख रुपये है। इसकी रनिंग कॉस्ट लगभग 1.12 रुपये प्रति किलोमीटर आती है। एक साल में इसे चलाने का खर्च करीब 18,900 रुपये और 5 साल में लगभग 95 हजार रुपये तक हो सकता है। मेंटेनेंस खर्च करीब 77,500 रुपये माना गया है।
हालांकि EV की शुरुआती कीमत पेट्रोल कार से ज्यादा होती है, लेकिन चार्जिंग पर खर्च काफी कम आता है। 5 साल में इसका कुल खर्च करीब 11.21 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। भविष्य में बैटरी की कीमत कम होने पर EV और सस्ती साबित हो सकती है।
फ्लेक्स फ्यूल कार: विकल्प नया, लेकिन खर्च ज्यादा
मारुति सुजुकी की फ्लेक्स फ्यूल वैगनआर की कीमत करीब 7.23 लाख रुपये है। इसमें E85 ईंधन का इस्तेमाल किया जा सकता है। इस कार की रनिंग कॉस्ट करीब 4.86 रुपये प्रति किलोमीटर आती है। 5 साल में ईंधन खर्च लगभग 3.65 लाख रुपये और मेंटेनेंस पर करीब 93 हजार रुपये खर्च हो सकते हैं। कुल मिलाकर 5 साल में इसका खर्च करीब 11.82 लाख रुपये तक पहुंच सकता है, जो पेट्रोल कार और EV दोनों से ज्यादा है।
फ्लेक्स फ्यूल कारों में इथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ने से प्रदूषण और तेल आयात कम करने में मदद मिल सकती है, लेकिन इनका माइलेज पेट्रोल कारों की तुलना में कम हो सकता है। कम माइलेज के कारण ज्यादा बार ईंधन भरवाना पड़ता है।
E85 फ्लेक्स फ्यूल कारों के सामने चुनौतियां
फ्लेक्स फ्यूल गाड़ियों को लेकर अभी कुछ चुनौतियां भी हैं-
कम माइलेज: भारतीय ग्राहकों के लिए माइलेज सबसे बड़ा मुद्दा है और इसमें फ्लेक्स फ्यूल कारें पीछे रह सकती हैं।
कम मॉडल उपलब्ध: अभी बाजार में E85 ईंधन से चलने वाली गाड़ियों के विकल्प बहुत सीमित हैं।
इथेनॉल इंफ्रास्ट्रक्चर: पूरे देश में इसका नेटवर्क मजबूत होने में कई साल लग सकते हैं।
EV को माना जा रहा भविष्य का विकल्प
सरकार का कहना है कि E20 पेट्रोल से भारत की कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी और किसानों को भी फायदा मिलेगा। वहीं, इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रदूषण कम करने और भविष्य की जरूरतों के हिसाब से बेहतर विकल्प माना जा रहा है।
EV की सबसे बड़ी खासियत कम रनिंग कॉस्ट और कम प्रदूषण है। हालांकि, इसके लिए देशभर में चार्जिंग स्टेशन का नेटवर्क बढ़ाना जरूरी है। फिलहाल पेट्रोल कार कम बजट वाले ग्राहकों के लिए आसान विकल्प है, फ्लेक्स फ्यूल तकनीक अभी शुरुआती दौर में है, जबकि EV को लंबी अवधि के लिए भविष्य की तकनीक माना जा रहा है।
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