Rajasthan Politics : दिल्ली की संसद में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक-2026 को लेकर हुई राजनीतिक हलचल अब राजस्थान की सियासत में भी दिखाई देने लगी है. नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विपक्ष के विरोध और विधेयक के पारित न हो पाने के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है. बीजेपी इसे महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ विपक्ष की बड़ी गलती बता रहा है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि सरकार इस मुद्दे के जरिए विपक्ष को बदनाम करने की कोशिश कर रही है.
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है, सीएम ने अपने सोशल मीडिया पर कहा कि यह लोकतंत्र के लिए निराशाजनक स्थिति है. उनका कहना है कि कुछ विपक्षी दलों ने मिलकर महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़े इस कदम का विरोध किया, जो गलत है, उन्होंने आगे कहा कि जनता, खासकर महिलाएं, आने वाले चुनावों में इसका जवाब जरूर देंगी.
अशोक गहलोत ने केंद्र पर उठाए सवाल
वहीं दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार पर सवाल खड़े किए हैं. गहलोत का कहना है कि अगर सरकार चाहती तो सभी दलों से चर्चा करके समाधान निकाला जा सकता था. गहलोत ने आरोप लगाया कि परिसीमन को लेकर आशंकाओं की वजह से यह विवाद बढ़ा और स्थिति यहां तक पहुंची. वहीं, बीजेपी की वरिष्ठ नेता वसुंधरा राजे ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि महिलाओं को मजबूत करने की हर कोशिश का समर्थन होना चाहिए. उनके अनुसार, कुछ दलों ने इस प्रक्रिया में बाधा डालकर गलत संदेश दिया है.
राज्य की राजनीति में नया तनाव
आपको बता दें कि राजस्थान की राजनीति में महिला मतदाताओं की भूमिका हमेशा से अहम रही है, और यही वजह है कि यह मुद्दा अब राजनीतिक रूप से और अधिक महत्वपूर्ण हो गया है. आने वाले समय में बीजेपी इस मुद्दे को जनता के बीच महिलाओं के अधिकारों से जोड़कर आगे बढ़ाने की कोशिश कर सकती है, जबकि कांग्रेस इसे परिसीमन और सामाजिक न्याय के सवालों से जोड़कर अपनी स्थिति मजबूत करने का प्रयास कर रही है. इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नया तनाव और बहस पैदा कर दी है.
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