Punjab News : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अगुवाई में पंजाब मंत्रिमंडल ने जनकल्याण सेवाओं के विस्तार और वित्तीय मजबूती प्रदान करते हुए एक अहम फैसले के तहत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एन.एफ.एस.ए.) के अंतर्गत आने वाले 40 लाख परिवारों को गेहूं, दाल, चीनी, तेल और नमक उपलब्ध कराने के लिए ऐतिहासिक ‘पंजाब सरकार खाद्य कार्यक्रम’ को मंजूरी दे दी है, जो पंजाब के इतिहास का सबसे व्यापक खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम है।
पांच वर्षों में जनकल्याण योजनाओं को मजबूती
मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने वर्ष 2026-27 के लिए आबकारी राजस्व में 12,800 करोड़ रुपये का लक्ष्य भी निर्धारित किया है, जिसके तहत अगले पांच वर्षों में जनकल्याण योजनाओं को मजबूत करने के लिए राजस्व संग्रह को दोगुना करने का अनुमान है।
सार्वजनिक संस्थानों के लिए एकमुश्त निपटान योजना
खाद्य कार्यक्रम के साथ-साथ कैबिनेट ने सरकारी भूमि पर खेती करने वाले बाढ़ प्रभावित किसानों को एकमुश्त मुआवजा देने के निर्णय को मंजूरी दी, सरकारी विभागों और सार्वजनिक संस्थानों के लिए एकमुश्त निपटान योजना को 30 जून, 2026 तक बढ़ाया और वांछित अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के लिए पारदर्शी इनाम नीति को स्वीकृति दी।
प्रशासनिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम
सरकार ने यह भी घोषणा की कि 16वीं पंजाब विधानसभा का बजट सत्र 6 मार्च से 16 मार्च तक आयोजित किया जाएगा और राज्य का बजट 8 मार्च को प्रस्तुत किया जाएगा। स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने के लिए 361 स्टाफ नर्सों के पद पुनः बहाल किए जाएंगे तथा कोविड वालंटियरों को भर्ती में आयु सीमा में छूट और अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे, जो भगवंत सिंह मान सरकार के तहत जनकल्याण, वित्तीय एकजुटता और प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक बड़े कदम का संकेत है।
बच्चों को पौष्टिक भोजन की सुविधा
आज यहां यह जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि इस जनपक्षीय पहल के तहत सरकार राज्य में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम-2013 (एन.एफ.एस.ए.) के तहत पंजीकृत लाभार्थियों को गेहूं के साथ-साथ चीनी, दाल, सरसों का तेल और नमक वितरित करेगी। इससे राज्य के लोगों, विशेषकर समाज के कमजोर और पिछड़े वर्गों, जिनमें 40 लाख एन.एफ.एस.ए. कार्डधारक शामिल हैं, को बड़ी राहत मिलेगी, जिससे वे अपने बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध करा सकेंगे। इस कदम से अप्रैल महीने से सुदृढ़ सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री की आपूर्ति से आम आदमी को बड़ा लाभ होगा।
राज्य की आबकारी नीति को भी मंजूरी
मंत्रिमंडल ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य की आबकारी नीति को भी मंजूरी दे दी है, जिसमें वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 12,800 करोड़ रुपये का आबकारी राजस्व एकत्र करने का लक्ष्य रखा गया है, जो कि वित्त विभाग द्वारा पिछले वित्तीय वर्ष के लिए निर्धारित 11,200 करोड़ रुपए के संशोधित लक्ष्य की तुलना में 1,600 करोड़ रुपये (12.5%) की वृद्धि दर्शाता है। आबकारी राजस्व, जो वर्तमान सरकार के कार्यकाल की शुरुआत में लगभग 6,200 करोड़ रुपये था, के पांच वर्षों की अवधि में दोगुना होने का अनुमान है।
किसानों को मुआवजा देने की मंजूरी
मंत्रिमंडल ने वर्ष 2025 में भारी वर्षा के दौरान आई बाढ़ से फसलों को हुए नुकसान के लिए उन किसानों (जो सरकारी भूमि पर खेती कर रहे हैं) को मुआवजा देने की भी मंजूरी दे दी है। इस निर्णय के अनुसार जिन किसानों की वर्ष 2025 की विशेष गिरदावरी के दौरान फसल नुकसान का आकलन किया गया था, लेकिन उन्हें फसल मुआवजा नहीं दिया गया था क्योंकि उनकी गिरदावरी 15 सितंबर, 2015 के माननीय हाई कोर्ट के निर्देशों और 25 सितंबर, 2015 के राज्य सरकार के पत्र के अनुपालन में सरकार के पक्ष में बदल दी गई थी, उन्हें भी फसल मुआवजा दिया जाएगा। यह मानवता के आधार पर एकमुश्त समाधान के रूप में किया जाएगा और किसी भी प्रकार से किसी को भी स्वामित्व अधिकार प्रदान नहीं करेगा।
इस हेतु जहां भी 25 सितंबर, 2015 से पहले खसरा गिरदावरी में दर्ज व्यक्ति अभी भी भूमि की खेती कर रहा है या उसके कानूनी वारिस भूमि की खेती कर रहे हैं, मुआवजा उस व्यक्ति या उसके कानूनी वारिसों को दिया जाएगा, जैसा भी मामला होगा। यदि कब्जे में कोई परिवर्तन पाया जाता है जो वर्ष 2015 के राजस्व रिकॉर्ड के अनुरूप नहीं है, तो कोई मुआवजा नहीं दिया जाएगा। सरपंच, नंबरदार और पटवारी की समिति इस संबंध में पुष्टि करेगी और किसानों को मुआवजा वितरित करने के लिए रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
ओ.टी.एस. योजना में 30 जून तक विस्तार
मंत्रिमंडल ने 13 मार्च, 2025 को अधिसूचित की गई एकमुश्त निपटान योजना (ओ.टी.एस.) को 31 दिसंबर, 2025 से बढ़ाकर 30 जून, 2026 तक लागू रखने की मंजूरी दे दी है। यह विस्तार केवल उन प्लॉटों पर लागू होगा जो सरकारी विभागों/सार्वजनिक संस्थानों को आवंटित किए गए हैं तथा उन आवंटियों पर भी लागू होगा जिन्होंने 7 मई, 2025 की नीति के तहत प्लॉटों की बहाली के लिए अपीलें दायर की थीं और जो ओ.टी.एस. योजना के अंतर्गत अपने बकाया का निपटान करने के पात्र थे तथा जिनके प्लॉट पी.एस.आई.ई.सी. के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स द्वारा बहाल किए गए हैं।
उन्हें 13 मार्च, 2025 से 30 जून, 2026 तक ओ.टी.एस. योजना के तहत ब्याज सहित अपने बकाया का निपटान करने की अनुमति होगी।
पारदर्शी इनाम नीति को मंजूरी
मंत्रिमंडल ने वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए पंजाब की इनामी नीति को भी मंजूरी दे दी है। इस कदम का उद्देश्य इनाम देने के लिए एक पारदर्शी और सुव्यवस्थित प्रक्रिया को संस्थागत रूप देना है, ताकि सूचना देने वालों को प्रोत्साहित किया जा सके और वांछित अपराधियों को पकड़ने में कानून लागू करने वाले जवानों के प्रयासों को मान्यता दी जा सके। विभिन्न स्तरों पर स्वीकृति देने की शक्तियां एस.एस.पी., पुलिस कमिश्नरों, डीजीपी और अन्य सक्षम अधिकारियों को प्रदान की गई हैं।
जिला योजना समितियों के साथ बेहतर समन्वय
मंत्रिमंडल ने आर्थिक नीति एवं योजना बोर्ड में वाइस-चेयरपर्सनों के दो अतिरिक्त पद सृजित करने को भी मंजूरी दे दी है। परिणामस्वरूप, बोर्ड में वाइस-चेयरपर्सनों की संख्या मौजूदा तीन से बढ़कर पांच हो जाएगी। इससे क्षेत्र-आधारित फोकस, योजनाओं की बेहतर निगरानी, विभागों और जिला योजना समितियों के साथ बेहतर समन्वय तथा त्वरित निर्णय लेने में सहायता मिलेगी।
विधानसभा का बजट सत्र 6 से 16 मार्च तक
मंत्रिमंडल ने 16वीं पंजाब विधानसभा का 12वां सत्र (बजट सत्र) 6 मार्च से 16 मार्च तक बुलाने की मंजूरी दे दी है। 6 मार्च को राज्यपाल का अभिभाषण होगा और 8 मार्च को वित्त मंत्री वर्ष 2026-27 के लिए बजट पेश करेंगे।
कोविड वालंटियरों को भर्ती में आयु सीमा में छूट
मंत्रिमंडल ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में महामारी के दौरान कार्य करने वाले कोविड वालंटियरों के साथ-साथ विभाग के अंतर्गत ठेका/आउटसोर्स आधार पर कार्यरत कर्मचारियों को ग्रुप-सी और ग्रुप-डी के रिक्त पदों पर अतिरिक्त अंक तथा ऊपरी आयु सीमा में विशेष छूट का लाभ देने की मंजूरी भी प्रदान की। यह लाभ कोविड महामारी के दौरान दी गई सेवाओं को उपयुक्त अनुभव के रूप में मानते हुए चालू वर्ष के दौरान 31 दिसंबर, 2026 तक की सीधी भर्ती में लागू होगा।
स्टाफ नर्सों के 361 पदों को पुनर्जीवित करने और भरने को हरी झंडी
मंत्रिमंडल ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग में स्टाफ नर्सों (ग्रुप-सी) के 361 रिक्त पदों को पुनः सृजित करने और भरने की मंजूरी दे दी है। इनमें 224 ऐसे पद शामिल हैं जो एक वर्ष से अधिक समय से रिक्त हैं और 137 पद ऐसे हैं जो एक वर्ष से कम समय से रिक्त हैं। इन पदों को पंजाब अधीनस्थ चयन सेवा बोर्ड के दायरे से बाहर रखते हुए बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज, फरीदकोट के माध्यम से भरा जाएगा।
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