Delhi Blast Case : दिल्ली में 10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास हुए ब्लास्ट में बड़ी जानकारी सामने आई है। व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल के आतंकी डॉक्टरों ने घोस्ट सिम कार्ड का प्रयोग किया था। जिसके माध्यम से वे पाकिस्तानी हैंडलर्स के साथ कोऑर्डिनेट किया करते थे।
एक रोजमर्रा का तो दूसरा टेरर फोन
जांच में पता चला कि आरोपी डॉक्टरों मुजम्मिल गनाई, अदील और अन्य आरोपियों ने सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए ‘डुअल-फोन’ प्रोटोकॉल अपनाया था। प्रत्येक आरोपी के पास दो-तीन मोबाइल हैंडसेट थे। शक से बचने के लिए इनके नाम पर रजिस्टर्ड एक क्लीन फोन होता था, और दूसरा ‘टेरर फोन’ केवल पाकिस्तानी हैंडलरों से व्हाट्सऐप और टेलीग्राम पर बातचीत के लिए था। इससे कोडनेम ‘उकासा’ (Ukasa), फैजान (Faizan) और हाशमी (Hashmi) के नाम से बात होती थी।
यूट्यूब के जरिए IED बनाने की ट्रेनिंग
जम्मू कश्मीर पुलिस ने भी बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि फर्जी आधार कार्ड के जरिए सिम कार्ड जारी किए जा रहे थे। अधिकारियों के अनुसार ये सिम कार्ड पाकिस्तान या पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में बैठे लोगों द्वारा मैसेजिंग ऐप्स पर सक्रिय रखे जाते थे। सुरक्षा एजेंसियों ने यह भी पाया कि ऐप्स को बिना फिजिकल सिम के चलाने की सुविधा का फायदा उठाकर हैंडलर्स ने यूट्यूब के जरिए IED बनाने की ट्रेनिंग दी।
अपने आप लॉगआउट हो जाएगें ऐप
नए नियमों के तहत 90 दिनों के भीतर सभी ऐप्स को सिर्फ एक्टिव सिम के साथ ही काम करना होगा। सिम न होने पर यूजर्स को व्हाट्सएप टेलीग्राम और सिग्नल जैसे ऐप्स से अपने आप लॉगआउट कर दिया जाएगा। स्नैपचैट शेयरचैट और जियोचैट सहित सभी सेवा प्रदाताओं को अनुपालन रिपोर्ट जमा करनी होगी।
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