धर्म

नागों को माता कद्रू ने क्यों दिया था श्राप? जानें आस्तीक मुनि ने कैसे किया नागवंश का उद्धार

Nag Panchami Story : हिंदू पौराणिक कथाओं में नागों की उत्पत्ति और उनके उद्धार की कहानी महाभारत के आदिपर्व के आस्तीक पर्व में मिलती है. इस कथा में नागों की माता कद्रू के श्राप से लेकर राजा जनमेजय के सर्पयज्ञ और आस्तीक द्वारा नागवंश की रक्षा किए जाने का वर्णन मिलता है.

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार कद्रू और विनता के बीच दिव्य घोड़े उच्चैःश्रवा के रंग को लेकर शर्त लगी. विनता का कहना था कि घोड़ा पूरी तरह सफेद है, जबकि कद्रू ने उसकी पूंछ काली होने की बात कही.

कद्रू ने अपने नाग पुत्रों से घोड़े की पूंछ से लिपटकर उसे काला दिखाने को कहा, ताकि वह शर्त जीत सके और विनता उसकी दासी बन जाए. कई नाग पुत्रों ने मां के इस छल में साथ देने से इनकार कर दिया. इससे क्रोधित कद्रू ने उन्हें श्राप दिया कि वे जीवित अवस्था में ही अग्नि में भस्म हो जाएंगे.

नागवंश पर मंडराया संकट

कथा के अनुसार नागों की संख्या बढ़ने और उनके विष तथा हिंसक स्वभाव से प्राणियों को खतरा पैदा होने लगा था. इसी बीच कद्रू के श्राप ने नागवंश के विनाश का संकट और गहरा कर दिया. नागराज वासुकि समेत अन्य नाग इस भविष्यवाणी से चिंतित हो गए.

उन्होंने महादेव की शरण ली. तब उन्हें बताया गया कि ऋषि जरत्कारु और नागकन्या जरत्कारु के पुत्र आस्तीक आगे चलकर नागवंश की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.

जनमेजय ने कराया सर्पयज्ञ

आगे चलकर राजा जनमेजय के पिता परीक्षित की मृत्यु तक्षक नाग के डसने से हुई. पिता की मृत्यु से क्रोधित जनमेजय ने नागों से बदला लेने के लिए सर्पयज्ञ शुरू कराया. यज्ञ के मंत्रों के प्रभाव से नाग अग्निकुंड में गिरने लगे और नागवंश पर भारी संकट आ गया.

तभी नागराज वासुकि ने आस्तीक से नागों की रक्षा करने का आग्रह किया. आस्तीक यज्ञस्थल पहुंचे और अपनी बुद्धिमत्ता तथा मधुर वाणी से राजा जनमेजय को प्रभावित किया.

आस्तीक ने ऐसे बचाया नागवंश

जनमेजय ने प्रसन्न होकर आस्तीक को वर मांगने के लिए कहा. आस्तीक ने सर्पयज्ञ रोकने और नागों को बचाने का वर मांगा. राजा ने उनकी बात स्वीकार कर ली और यज्ञ रोक दिया गया.

इस तरह वासुकि, शेषनाग और तक्षक सहित बचे हुए नागों का जीवन बच गया. पौराणिक परंपरा में आस्तीक को नागवंश के रक्षक के रूप में याद किया जाता है. उनकी कथा यह संदेश भी देती है कि बुद्धि, संयम और शांतिपूर्ण प्रयास से प्रतिशोध की भावना को रोका जा सकता है. इसी वजह से आस्तीक की कथा नाग पूजा और नाग पंचमी की लोकपरंपराओं में विशेष महत्व रखती है.

Disclaimer: Hindi khabar इस लेख की पुष्टि नहीं करता. यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं एवं उपलब्ध ग्रंथों पर आधारित है.

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