LPG Crisis : मिडिल ईस्ट में जारी जंग का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। जिससे हर देश में तेल-LPG के दामों में बढ़ोतरी हो रही है। वहीं भारत भी इसकी जद में आ गया है। कच्चे तेल और गैस की आयात में कमी आई है, जिससे ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के पास स्टॉक तेजी से घट रहा है। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार और कंपनियां तैयारी कर रही हैं।
सिलेंडर में 10 किलो गैस…
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घरेलू गैस सिलेंडर में दी जाने वाली एलपीजी की मात्रा घटाने पर विचार किया जा रहा है। योजना के तहत 14.2 किलो वाले सिलेंडर में अब लगभग 10 किलो गैस भरी जा सकती है। इससे कम स्टॉक होने के बावजूद अधिक घरों तक एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।
खाड़ी देशों से नहीं पहुंचे नए शिपमेंट
देश में फिलहाल एलपीजी आयात दबाव में है क्योंकि खाड़ी देशों से नए शिपमेंट नहीं पहुंचे हैं। पिछले सप्ताह दो जहाजों से लगभग 92,700 टन गैस आयात हुई, जो देश की केवल एक दिन की खपत के बराबर है। वहीं, कमर्शियल यूजर्स को सप्लाई शुरू होने से स्टॉक पर और दबाव बढ़ गया है।
सिलेंडरों पर लगाए जाएंगे अलग स्टिकर
अगर सिलेंडर में गैस कम की जाती है, तो उसकी कीमत भी उसी हिसाब से तय होगी। अधिकारियों ने कहा है कि ऐसे सिलेंडरों पर अलग स्टिकर लगाया जाएगा ताकि पता चल सके कि इसमें कम गैस भरी गई है। इसके लिए बॉटलिंग प्लांट्स को अपने सिस्टम में बदलाव करना होगा और आवश्यक रेगुलेटरी मंजूरियां लेनी होंगी।
कंफ्यूजन और विरोध की भावना…
कंपनियों ने इस योजना को लेकर अपनी चिंता जताई है। उनका मानना है कि अचानक सिलेंडर का वजन कम होने से कंफ्यूजन और विरोध की भावना पैदा हो सकती है। विशेष रूप से उन राज्यों में जहां विधानसभा चुनाव होने हैं, स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। अधिकारियों के अनुसार, अगर अगले महीने स्थिति और खराब हुई तो यह गंभीर चिंता का विषय बन सकती है।
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