Kharif Rice Production : केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि इस साल खरीफ सीजन में देश का चावल उत्पादन पिछले वर्ष के स्तर से अधिक रहने की संभावना है। उन्होंने बताया कि कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश से फसल को आंशिक नुकसान जरूर हुआ है, लेकिन इसका कुल उत्पादन पर बड़ा असर पड़ने की उम्मीद नहीं है।
बारिश से कुछ फसलों को हुआ नुकसान
मंत्री के अनुसार, अच्छी मानसूनी बारिश के कारण धान की बुवाई इस बार बेहतर तरीके से आगे बढ़ी है। हालांकि आंध्र प्रदेश और तेलंगाना जैसे राज्यों में अधिक बारिश से कुछ फसलों को नुकसान हुआ है, लेकिन देशव्यापी उत्पादन मजबूत रहने का अनुमान है।
इस बार धान की बुवाई का क्षेत्रफल
खरीफ चावल, जिसकी कटाई आमतौर पर नवंबर के आसपास होती है, भारत के कुल चावल उत्पादन का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा होता है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, फसल वर्ष 2023-24 में खरीफ चावल का उत्पादन करीब 114.36 मिलियन टन दर्ज किया गया था। सरकारी आंकड़ों में यह भी बताया गया है कि इस बार धान की बुवाई का क्षेत्रफल बढ़कर लगभग 41 मिलियन हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 1.64 मिलियन हेक्टेयर अधिक है।
फसलों में नुकसान की स्थिति
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सोयाबीन जैसी कुछ तिलहन फसलों में नुकसान की स्थिति जरूर बनी है, लेकिन कुल खरीफ उत्पादन पर इसका सीमित प्रभाव रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि दलहन, मोटे अनाज और तिलहन की बुवाई का क्षेत्र भी बढ़ा है, जिससे बेहतर उत्पादन की उम्मीद है।
कृषि उत्पादन और किसानों की आय
सरकार ने हाल ही में बासमती चावल पर लागू 950 डॉलर प्रति टन का न्यूनतम निर्यात मूल्य (MEP) हटा दिया है। इस फैसले का उद्देश्य निर्यात को बढ़ावा देना और किसानों की आय बढ़ाना बताया गया है। मंत्री ने यह भी कहा कि बेहतर बीज किस्मों और सरकारी समर्थन नीतियों के चलते इस बार कृषि उत्पादन और किसानों की आय दोनों में सुधार की संभावना है।
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