Uttar Pradeshराजनीति

संजय सिंह का केंद्र सरकार पर हमला: महिला आरक्षण, मतदाता सूची और विदेश नीति पर उठाए सवाल

Indian Politic : आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने रविवार को मीडिया से बातचीत करते हुए महिलाओं के आरक्षण, मतदाता सूची में भारी गड़बड़ी और केंद्र सरकार की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला, उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि मौजूदा विधानसभा संरचना में 35 प्रतिशत आरक्षण देना हो तो आम आदमी पार्टी तत्काल समर्थन करेगी, लेकिन सीटों में किसी भी प्रकार का घटाव-बढ़ाव करने से पहले जनगणना अनिवार्य है. बिना जनगणना डीलिमिटेशन करना महिलाओं के साथ सीधा विश्वासघात है.

संजय सिंह ने उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रदेश की जनसंख्या में लगभग हर 100 लोगों में 52 पुरुष और 48 महिलाएं हैं, लेकिन मतदाता सूची में पुरुषों की हिस्सेदारी 54.54 से 55 प्रतिशत के बीच और महिलाओं की मात्र 45 से 45.64 प्रतिशत है, उन्होंने सवाल किया कि आखिर यह लगभग ढाई से तीन प्रतिशत महिला मतदाता कहां चली गईं, उन्होंने यह भी पूछा कि क्या यह अंतर पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग से आने वाली महिलाओं से जुड़ा हुआ है और सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि किन महिलाओं के वोट काटे गए हैं.

चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल

संजय सिंह ने कहा कि जनसंख्या के अनुपात और मतदाता सूची के आंकड़ों के बीच यह अंतर बेहद चिंताजनक है और यह लोकतंत्र के लिए खतरे का संकेत है. यदि महिलाओं की इतनी बड़ी संख्या मतदाता सूची से गायब है, तो यह चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है, उन्होंने आशंका जताई कि यह अंतर किसी विशेष वर्ग, खासकर पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्ग से आने वाली महिलाओं को प्रभावित कर सकता है.

उन्होंने कहा कि कुछ लोग यह भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं कि इससे भारतीय जनता पार्टी का नुकसान हुआ है, जबकि सच्चाई इसके विपरीत है. संजय सिंह ने कहा कि अब जो भी मतदाता संख्या बढ़ेगी, उसका लाभ भारतीय जनता पार्टी को मिलेगा, जबकि विपक्ष को इसका फायदा नहीं होगा.

मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर अंतर उजागर

मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर अंतर को उजागर करते हुए संजय सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के कर्मचारियों ने दो अलग-अलग सूचियां तैयार कीं. नगर पालिका और नगर निगम के लिए एक सूची तथा ग्राम पंचायत के चुनाव के लिए दूसरी सूची बनाई गई. दिसंबर में जारी सूची में कुल मतदाता 17 करोड़ 2 लाख थे, जबकि जनवरी में विधानसभा की सूची जारी होने पर यह संख्या घटकर 12 करोड़ 55 लाख रह गई, उन्होंने सवाल किया कि साढ़े चार करोड़ मतदाता आखिर कहां गायब हो गए.

हर चौथा मतदाता फर्जी घोषित करने पर सवाल

सरकार पर हमला तेज करते हुए संजय सिंह ने कहा कि एसआईआर एक बहुत बड़ा चुनावी घोटाला है और इसके तहत बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम काटे गए हैं, उन्होंने कहा कि लखनऊ में ही 22 से 23 प्रतिशत वोट काट दिए गए, यानी हर चौथा मतदाता फर्जी घोषित कर दिया गया, उन्होंने सवाल किया कि क्या यह वास्तव में संभव है.

भारत की पहचान और शांति वार्ता पर सवाल

अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बोलते हुए संजय सिंह ने कहा कि भारत महात्मा गांधी, गौतम बुद्ध, गुरु नानक देव और संत कबीर की धरती है, लेकिन आज शांति वार्ता पाकिस्तान जैसे देश कर रहा है जो आतंकवादियों को प्रशिक्षण देता है, उन्होंने इसे प्रधानमंत्री की “ही ही खी खी” वाली विदेश नीति की असफलता बताया और कहा कि इस तरह की नीति से देश की अंतरराष्ट्रीय साख कमजोर होती है.

उन्होंने कहा कि विदेश नीति हंसी-मजाक से नहीं चलती, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने कर्म और चरित्र से प्रतिष्ठा बनानी पड़ती है. जब हर फैसले के लिए अमेरिका की अनुमति लेनी पड़े तो दुनिया में देश की क्या स्थिति होगी, यह समझा जा सकता है.

शांति वार्ता असफल होने पर जश्न पर आपत्ति

संजय सिंह ने कहा कि यदि दुनिया में युद्ध जारी रहेगा तो उसका सीधा असर भारत पर पड़ेगा. हारमोंस का समुद्री मार्ग बंद होने से तेल और गैस के दाम बढ़ेंगे, जिससे आम जनता पर महंगाई का बोझ बढ़ेगा, उन्होंने कहा कि युद्ध रुकना जरूरी है, तभी महंगाई पर नियंत्रण होगा, गरीब को राहत मिलेगी और मजदूरों का पलायन रुकेगा.

अंत में उन्होंने कहा कि शांति वार्ता असफल होने पर जश्न मनाना गलत है और जो लोग ऐसा कर रहे हैं उन्हें रुकना चाहिए. भारत को आगे आकर शांति स्थापित करने की पहल करनी चाहिए, क्योंकि युद्ध रुकना ही देश और दुनिया दोनों के हित में है.

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