Onion Price : सावन की विदाई और रक्षाबंधन के बाद त्योहारों का मौसम शुरू हो चुका है. घरों में तैयारियां बढ़ रही हैं, लेकिन रसोई के बजट पर महंगी होती सब्जियों ने चिंता बढ़ा दी है. एलपीजी के बाद अब प्याज के बढ़ते दाम लोगों की जेब पर असर डाल रहे हैं. हालात को संभालने के लिए केंद्र सरकार बफर स्टॉक से प्याज की सप्लाई बढ़ा रही है. बड़े खपत वाले राज्यों तक प्याज पहुंचाने के लिए ‘कांदा एक्सप्रेस’ जैसी विशेष मालगाड़ियों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है.
प्याज महंगा होने की सबसे बड़ी वजह अचानक बढ़ी मांग नहीं, बल्कि पुराने स्टॉक के खत्म होने और नई फसल की आवक के बीच बना अंतर है. मार्च-अप्रैल में कटाई के समय बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से प्याज में नमी बढ़ी. इसके बाद भंडारण के दौरान फंगस और काला सड़न रोग का असर हुआ. सामान्य तौर पर 25% तक होने वाला भंडारण नुकसान बढ़कर 35-40% तक पहुंच गया.
सितंबर-नवंबर में बढ़ता है दबाव
देश का 50-60% प्याज उत्पादन महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और कर्नाटक में होता है. इन राज्यों में मौसम खराब होने पर देशभर की सप्लाई प्रभावित होती है. सितंबर से नवंबर के बीच खरीफ फसल आने से पहले रबी के पुराने स्टॉक पर निर्भरता बढ़ जाती है. स्टॉक जल्दी खत्म होने पर कीमतों में तेज उछाल आता है.
जमाखोरी और कमजोर भंडारण भी चुनौती
किसान से ग्राहक तक पहुंचने के दौरान कई स्तरों पर मार्जिन जुड़ता है. कमी की आशंका में जमाखोरी और सट्टेबाजी भी कीमत बढ़ा सकती है. वहीं पारंपरिक ‘कांदा चाल’ हर मौसम में प्याज बचाने के लिए पर्याप्त नहीं है. सामान्य कोल्ड स्टोरेज में प्याज रखने पर अंकुरण की समस्या भी आती है.
विशेषज्ञों के मुताबिक सितंबर-अक्टूबर में कीमतें ऊंचे स्तर पर पहुंच सकती हैं. नई खरीफ फसल की आवक समय पर और अच्छी गुणवत्ता के साथ हुई तो राहत मिल सकती है. लेकिन बारिश से फसल प्रभावित हुई तो दाम और बढ़ने का खतरा है. फिलहाल बफर स्टॉक से सरकारी सप्लाई महंगे शहरों में कुछ राहत दे सकती है.
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