Marathi Language : महाराष्ट्र में ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा का ज्ञान अनिवार्य किए जाने का मुद्दा फिलहाल अदालत में एक कदम आगे बढ़ा है, लेकिन विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस संबंध में दाखिल जनहित याचिका का निपटारा कर दिया है. हालांकि, सरकार की ओर से चालकों को दी गई एक साल की अतिरिक्त मोहलत अब नए कानूनी विवाद की वजह बनती दिखाई दे रही है.
यह जनहित याचिका मोहम्मद कासिम अहमद की ओर से अधिवक्ता विवेक शुक्ला ने दाखिल की थी. सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार के परिवहन विभाग ने अदालत को बताया कि ऑटो-टैक्सी चालकों को मराठी भाषा सीखने के लिए एक साल का अतिरिक्त समय दिया गया है. सरकार की ओर से अदालत के सामने यह बात रखे जाने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया.
मीडिया में बयान पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील विवेक शुक्ला ने सरकार के पहले दिए गए मीडिया बयान पर सवाल उठाया. उनका कहना था कि जब मामला अदालत में लंबित है, तब केवल मीडिया में दिए गए बयान को आधार बनाकर याचिका का निपटारा नहीं किया जा सकता, उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का रुख अदालत के सामने आधिकारिक रूप से दर्ज होना चाहिए और उसका उल्लेख कोर्ट के आदेश में भी होना जरूरी है.
इसके बाद अदालत ने अतिरिक्त सरकारी वकील से सरकार से स्पष्ट निर्देश लेने को कहा. कुछ समय के लिए सुनवाई रोकी गई. बाद में अतिरिक्त सरकारी वकील ने सरकार की ओर से अदालत के समक्ष आधिकारिक बयान दर्ज कराया.
एक साल की मोहलत पर भी विरोध
इस दौरान मराठी एकीकरण समिति ने महाराष्ट्र में भाषिक अधिकारों को लेकर अपना पक्ष रखा. समिति ने सरकार के उस फैसले पर भी असहमति जताई, जिसमें चालकों को मराठी सीखने के लिए एक साल की अतिरिक्त मोहलत दी गई है. समिति का कहना है कि मराठी भाषा सीखने की अनिवार्यता लागू करने में अब और देरी नहीं होनी चाहिए.
अगले सप्ताह फिर अदालत पहुंचेगा मामला
मराठी एकीकरण समिति अब सरकार की ओर से दी गई एक साल की मोहलत को चुनौती देने की तैयारी में है. समिति अगले सप्ताह अदालत के सामने अपनी दलीलें रखेगी. ऐसे में एक PIL का निपटारा भले ही हो गया हो, लेकिन ऑटो-टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा की अनिवार्यता और अतिरिक्त मोहलत को लेकर कानूनी लड़ाई आगे भी जारी रह सकती है.
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