Delhi Riots Case : दिल्ली दंगों के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला लिया है. सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी है. कोर्ट ने कहा है कि इन पर UAPA के तहत केस चलता रहेगा.
दिल्ली दंगा मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को छोड़कर अन्य पांच आरोपियों को सुप्रीम कोर्ट से जमानत दे दी है. जमानत पाने वालों में गुलफिशा, मिरान, सलीम, शिफा और शादाब शामिल हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने अपने फैसले में उचित आधारों का पालन किया था, लेकिन लंबे समय से जेल में रहने को लेकर सिर्फ देरी के कारण जमानत नहीं दी जा सकती. ऐसे मामलों में विभिन्न पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है. देश की सुरक्षा का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है. मुकदमे विशेष कानून के तहत दर्ज किए गए हैं, जो संसद द्वारा विशेष परिस्थितियों के लिए बनाए गए हैं.
स्वतंत्रता का हनन मनमाना नहीं होगा
देश की शीर्ष अदालत ने कहा कि ये अपीलें हाईकोर्ट द्वारा जमानत नामंजूर किए गए सामान्य फैसले के खिलाफ दायर की गई हैं. लंबे समय तक कारावास और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत स्वतंत्रता के संबंध में तर्क प्रस्तुत किए गए थे. यह न्यायालय संविधान और कानून के बीच तुलना करने में संलग्न नहीं है. अनुच्छेद 21 संवैधानिक व्यवस्था में केंद्रीय स्थान रखता है. मुकदमे से पहले की कैद को सजा का दर्जा नहीं दिया जा सकता. स्वतंत्रता का हनन मनमाना नहीं होगा.
न्यायिक जांच पर कोई असर नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विशेष कानून के तहत यूएपीए मुकदमे जमानत की शर्तों में विधायी निर्देश देता है. यूएपीए की धारा 43डी(5) सामान्य जमानत नियमों से अलग है. हालांकि, यह न्यायिक जांच को खत्म नहीं करता और जमानत से इनकार को अपने आप अनिवार्य नहीं बनाता.
जांच पर कोई असर नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रायल में देरी से न्यायिक जांच और अधिक गहन हो सकती है. यूएपीए की धारा 43डी(5) सामान्य जमानत नियमों से अलग है. यह न्यायिक जांच को प्रभावित नहीं करता और डिफ़ॉल्ट रूप से जमानत से इनकार को अनिवार्य नहीं बनाता.
ये भी पढ़ें- दिल्ली के ली मेरिडियन होटल से शख्स ने लगाई छलांग, 12वीं मंजिल से कूदकर दी जान
Hindi Khabar App: देश, राजनीति, टेक, बॉलीवुड, राष्ट्र, बिज़नेस, ज्योतिष, धर्म-कर्म, खेल, ऑटो से जुड़ी ख़बरों को मोबाइल पर पढ़ने के लिए हमारे ऐप को प्ले स्टोर से डाउनलोड कीजिए. हिन्दी ख़बर ऐप









