
Madhya Pradesh : मध्यप्रदेश में आगामी राज्यसभा चुनाव अब पहले से कहीं ज्यादा दिलचस्प मोड़ पर हैं। विधानसभा की मौजूदा स्थिति के आधार पर जहां दो सीटें भाजपा और एक सीट कांग्रेस के खाते में जाने की संभावना थी, वहीं अब कांग्रेस की “आसान” मानी जा रही सीट पर भी सियासी गणित उलझता दिख रहा है। यह वही सीट है, जिस पर फिलहाल पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सदस्य हैं और उनका कार्यकाल जून में समाप्त हो रहा है।
कांग्रेस के लिए मुश्किलें बढ़ीं
हालिया घटनाओं और विधानसभा के समीकरण में बदलाव के कारण कांग्रेस के प्रभावी वोट घटकर लगभग 62 रह गए हैं।
- दतिया विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त हो जाने से कांग्रेस की संख्या घटकर 64 हो गई।
- विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान पर कोर्ट ने रोक लगा दी है।
- बीना विधायक निर्मला सप्रे का मामला लंबित है, लेकिन उनका झुकाव भाजपा की ओर माना जा रहा है।
राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 वोट जरूरी हैं। संख्या भले कांग्रेस के पास है, लेकिन पार्टी के भीतर असंतोष और संभावित क्रॉस वोटिंग उसकी मुश्किलें बढ़ा सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, 4-5 कांग्रेस विधायक भाजपा के संपर्क में बताए जा रहे हैं।
भाजपा की रणनीति
भाजपा इस स्थिति का फायदा उठाकर तीसरी सीट पर भी उम्मीदवार उतारने की रणनीति बना रही है। पार्टी के पास कुल 164 विधायक हैं। दो सीटें जीतने के बाद भी उनके पास लगभग 48 वोट बचेंगे। यदि कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग होती है और भाजपा को कुछ अतिरिक्त समर्थन मिल जाता है, तो पार्टी तीसरी सीट पर भी जीत दर्ज कर सकती है।
कांग्रेस में संभावित उम्मीदवारों की चर्चाएँ
दिग्विजय सिंह के दोबारा चुनाव न लड़ने के संकेत के बाद कांग्रेस में दावेदारी तेज हो गई है। फिलहाल मीनाक्षी नटराजन और कमल नाथ सहित कुछ अन्य नाम चर्चा में हैं। वहीं, पार्टी के भीतर दलित या आदिवासी चेहरे को मौका देने की मांग भी जोर पकड़ रही है।
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