
Sambhal Violence : संभल हिंसा की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद अब इस मामले में सियासी घमासान और तेज हो गया है। जांच रिपोर्ट में संभल हिंसा को लेकर कई लोगों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं, वहीं सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क तथा विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल का नाम भी चर्चा में आया है। रिपोर्ट में खुद के बेटे का नाम आने पर संभल के सपा विधायक इकबाल महमूद ने जांच आयोग की पूरी रिपोर्ट को ही कठघरे में खड़ा कर दिया।
रिपोर्ट को लेकर विधायक ने साफ शब्दों में कहा कि वह इससे बिल्कुल इत्तेफाक नहीं रखते। उन्होंने रिपोर्ट को पूरी तरह झूठ पर आधारित बताया और कहा कि वह इस रिपोर्ट पर विश्वास नहीं करते।
रिपोर्ट आई तो विधायक ने ही रिपोर्ट पर सवाल खड़े कर दिए
इकबाल महमूद ने कहा कि आयोग सरकार के निर्देश पर बनाया गया था और आयोग ने सर्वे तथा जांच के बाद सरकार को रिपोर्ट सौंपी। विधानसभा में रिपोर्ट पेश होने के बाद अब उन्होंने इसकी निष्पक्षता पर ही सवाल उठा दिए हैं। विधायक का कहना है कि जिस रिपोर्ट को सरकार गंभीर जांच का नतीजा बता रही है, वह उनके मुताबिक सच्चाई पर आधारित नहीं है।
संभल हिंसा को हिंदू-मुस्लिम विवाद मानने से विधायक का इनकार
इकबाल महमूद ने संभल हिंसा को हिंदू-मुस्लिम विवाद मानने से साफ इनकार किया। उनका दावा है कि संभल में हिंदू और मुस्लिमों के बीच कोई झगड़ा नहीं था, बल्कि पुलिस की गोलीबारी के बाद हालात बिगड़े।
विधायक ने आरोप लगाया कि पुलिस के एक अधिकारी की भूमिका संदिग्ध थी और पुलिस की कार्रवाई के कारण हिंसा बढ़ी। उन्होंने दावा किया कि गोलीबारी में पांच लोगों की मौत हुई। रिपोर्ट में मौतों को लेकर सामने आए निष्कर्षों पर भी विधायक ने सवाल खड़े किए और कहा कि क्या प्रदर्शन कर रहा कोई समुदाय अपने ही लोगों पर गोली चलाएगा।
बेटे सुहैल इकबाल को लेकर विधायक का बड़ा दावा
इकबाल महमूद ने कहा कि पुलिस ने मामले की जांच की थी और पुलिस की जांच में उनके बेटे सुहैल इकबाल की कोई भूमिका सामने नहीं आई थी। विधायक के मुताबिक, इसी वजह से पुलिस ने जो चार्जशीट दाखिल की, उसमें उनके बेटे का नाम शामिल नहीं किया गया।
हालांकि FIR में उनके बेटे का नाम था और जांच आयोग ने भी उन्हें दोषी माना है, तो विधायक ने कहा कि आयोग ने शायद FIR में नाम दर्ज होने के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला होगा। उन्होंने साफ कहा कि वह आयोग के इस निष्कर्ष से भी सहमत नहीं हैं।
199 गवाहों के बयान पर भी उठाया सवाल
जांच आयोग के सामने करीब 199 लोगों के बयान दर्ज होने का जिक्र आने पर विधायक ने सवाल किया कि क्या इन सभी गवाहों ने उनके बेटे को दोषी बताया है। जब विधायक को बताया गया कि गवाहों में हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोग शामिल हैं, तो विधायक ने आरोप लगाया कि संभल में उस समय पुलिस का दबाव था और लोग स्वतंत्र होकर अपनी बात नहीं रख पा रहे थे। उन्होंने दावा किया कि लोगों से वैसा ही बयान दिलवाया जा रहा था, जैसा पुलिस या प्रशासन चाहता था।
जांच आयोग की रिपोर्ट पर सबसे बड़ा सवाल
इकबाल महमूद ने आयोग की रिपोर्ट की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया। उनका कहना है कि वह ऐसी जांच को न्यायिक जांच नहीं मानते, जिसमें हाईकोर्ट के मौजूदा जज की अध्यक्षता न हो। विधायक ने दावा किया कि रिपोर्ट में केवल आयोग के चेयरमैन के हस्ताक्षर हैं, जबकि दो अन्य सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं हैं।
इसी बात को आधार बनाकर उन्होंने सवाल उठाया कि अगर दोनों सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं हैं, तो क्या वे इस रिपोर्ट से सहमत थे।
संभल के CO रहे अनुज चौधरी पर विधायक ने लगाए गंभीर आरोप
संभल हिंसा को लेकर इकबाल महमूद ने तत्कालीन CO की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए। विधायक ने दावा किया कि उन्होंने कई बार DGP से लेकर SP और शासन स्तर तक अधिकारी की शिकायत की थी और उसे संभल से हटाने की मांग की थी।
विधायक ने आरोप लगाया कि उक्त अधिकारी की वजह से संभल में अव्यवस्था और कथित वसूली का माहौल बना हुआ था। इकबाल महमूद ने अपने आरोपों को आगे बढ़ाते हुए कहा कि उन्होंने कई बार शिकायत की, लेकिन अधिकारी को हटाया नहीं गया और उनके मुताबिक, इसी अधिकारी की भूमिका के कारण हिंसा भड़की।
संभल में पलायन और मंदिर-मस्जिद को नुकसान पर भी विधायक का जवाब
रिपोर्ट में संभल के पुराने घटनाक्रम और सांप्रदायिक तनाव से जुड़े दावों पर भी विधायक ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि संभल में कोई पलायन नहीं हुआ। विधायक ने यह भी कहा कि किसी मंदिर या मस्जिद को उस घटना में नुकसान नहीं पहुंचाया गया।
उन्होंने पुराने मंदिर का जिक्र करते हुए कहा कि जब मंदिर के कपाट खोले गए, तो वहां मौजूद सामान और पुराने सिक्के उसी स्थिति में मिले, जिस स्थिति में उन्हें छोड़ा गया था। उन्होंने दावा किया कि मंदिर के पुजारी ने भी कहा था कि मंदिर की स्थिति पहले जैसी ही थी।
46 साल बाद मंदिर खुलने के दावे को भी बताया एकतरफा
संभल में वर्षों बाद मंदिर खुलने और उससे जुड़े दावों पर भी इकबाल महमूद ने सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि इस मामले को एकतरफा तरीके से पेश किया जा रहा है। विधायक ने दावा किया कि इन बातों के जरिए संभल और संभल की जनता को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि संभल में हिंदू-मुस्लिम भाईचारा पहले भी था, आज भी है और आगे भी रहेगा।
जामा मस्जिद सर्वे को लेकर विधायक ने क्या कहा
जामा मस्जिद के सर्वे को लेकर इकबाल महमूद ने कहा कि पहले हुए सर्वे के दौरान किसी ने कोई अड़चन नहीं डाली थी। उनका सवाल था कि दूसरे दिन होने वाले सर्वे की जानकारी लोगों तक कैसे पहुंची। विधायक ने दावा किया कि लोगों को भरोसे में लिए बिना कार्रवाई की गई और इसी वजह से स्थिति बिगड़ती चली गई। उन्होंने कहा कि लोगों ने जब जामा मस्जिद परिसर से पानी निकलते देखा, तो उन्हें लगा कि शायद अंदर खुदाई जैसी कोई कार्रवाई हो रही है।
1978 के दंगों का जिक्र क्यों किया गया
जांच रिपोर्ट में 1978 के दंगों और उससे भी पुराने घटनाक्रमों के जिक्र पर इकबाल महमूद ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि आयोग को 24 नवंबर 2024 की हिंसा और जामा मस्जिद के सर्वे से जुड़े विवाद की जांच करनी थी, तो फिर 1942 से लेकर पुराने घटनाक्रमों को रिपोर्ट में शामिल करने का क्या मतलब है। विधायक ने सवाल उठाया कि जिस घटना की जांच के लिए आयोग बनाया गया था, उससे अलग इतने पुराने मामलों को रिपोर्ट का हिस्सा क्यों बनाया गया।
जामा मस्जिद कमेटी के पदाधिकारियों पर कार्रवाई पर भी विधायक ने साधी चुप्पी
जब विधायक से जामा मस्जिद के सदर जफर अली, सचिव मसूद अली फारूकी, उपाध्यक्ष और अधिवक्ता कासिम जमाल समेत अन्य लोगों को आयोग की रिपोर्ट में दोषी ठहराए जाने संबंधी सवाल किया गया, तो इकबाल महमूद ने कहा कि जब वह आयोग की रिपोर्ट को ही सही नहीं मानते, तो इन लोगों के बारे में क्या जवाब दें।
अब रिपोर्ट के खिलाफ खुलकर मोर्चा
संभल हिंसा की रिपोर्ट सामने आने के बाद इकबाल महमूद ने साफ कर दिया है कि वह इसे स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं। एक तरफ जांच आयोग की रिपोर्ट है, जिसमें हिंसा के घटनाक्रम और कई लोगों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। दूसरी तरफ सपा विधायक इकबाल महमूद हैं, जो रिपोर्ट की निष्पक्षता, पुलिस की भूमिका, गवाहों के बयान और आयोग की प्रक्रिया तक पर सवाल उठा रहे हैं।
अब संभल की इस रिपोर्ट ने एक नया सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर 24 नवंबर 2024 की हिंसा की सच्चाई क्या है और जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों पर भरोसा किया जाए या विधायक के गंभीर सवालों पर जवाब मांगा जाए।
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