
Political News : दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित एआई समिट के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की युवा इकाई ने शर्टलेस प्रदर्शन किया, जिसने न केवल राजनीतिक गलियारों में हलचल मचाई, बल्कि विपक्षी खेमे में दरार भी पैदा कर दी है। यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शर्ट उतारकर प्रदर्शन किया, जो कि एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर बहुत ही विवादास्पद कदम साबित हुआ। इस पर कांग्रेस के भीतर भी मतभेद उभरकर सामने आ गए हैं।
इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों का कांग्रेस से दूरी
कांग्रेस के इस विवादित कदम के बाद, इंडिया गठबंधन के कई सहयोगी दलों ने सार्वजनिक रूप से कांग्रेस से दूरी बना ली है। इससे विपक्ष की एकजुटता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। इन दलों का मानना है कि कांग्रेस का यह कदम विपक्षी एकता को नुकसान पहुंचा सकता है, खासकर ऐसे समय में जब भाजपा के खिलाफ सभी दल एकजुट होने की कोशिश कर रहे हैं।
मार्गरेट अल्वा का अनुशासन पर जोर
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मार्गरेट अल्वा ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अनुशासन और जिम्मेदारी सर्वोपरि होनी चाहिए। उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से यह संदेश दिया कि विरोध का तरीका और मंच दोनों को सोच-समझकर चुनना चाहिए। उनके बयान ने कांग्रेस के भीतर इस प्रदर्शन को लेकर मतभेद को और हवा दी।
कांग्रेस के भीतर विरोध, प्रदर्शन का स्थान गलत था
कांग्रेस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि विपक्ष का विरोध करना उनका अधिकार है, लेकिन प्रदर्शन का स्थान गलत था। हालांकि, पार्टी में लाइन तय होने के बाद कई नेताओं ने इस प्रदर्शन का समर्थन किया, खासकर सोशल मीडिया पर। इससे कांग्रेस के भीतर असहमति की स्थिति साफ तौर पर नजर आई।
सपा और आरजेडी का कांग्रेस से दूरी बनाना
कांग्रेस के इस विवादित कदम पर समाजवादी पार्टी (सपा) और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने भी अपनी नाराजगी जाहिर की है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी को लेकर गुस्सा होना एक अलग बात है, लेकिन ऐसा प्रदर्शन जो विदेशों में देश की छवि को नुकसान पहुंचाए, उसे समर्थन नहीं दिया जा सकता।
आरजेडी के मनोज झा ने भी कहा कि प्रदर्शन के लिए सही जगह का चुनाव महत्वपूर्ण है। उन्होंने इसे एआई समिट में प्रदर्शन के लिए गलत स्थान बताया और कहा कि भारत-अमेरिकी ट्रेड डील को लेकर गुस्सा होना समझ में आता है, लेकिन इस तरह का प्रदर्शन किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर उचित नहीं था।
कांग्रेस के सामने असली चुनौती
कांग्रेस के लिए असली चुनौती विपक्षी दल नहीं, बल्कि उसके अपने सहयोगी बनते दिख रहे हैं। विपक्षी दलों के समर्थन की कमी और आलोचना ने कांग्रेस के लिए आगामी चुनावों में एक नई मुश्किल खड़ी कर दी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इस मुद्दे को कैसे सुलझाती है और अपने सहयोगियों के साथ अपने रिश्तों को कैसे सुधारती है।
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