India Russia Relations : भारत में एक महीने तक तेल कीमतों के बढ़ने का संकट फिलहाल खत्म हो गया है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने रूस से तेल खरीद पर भारतीय तेल रिफाइनरी कंपनियों को 30 दिन की छूट दी है। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने बताया कि ग्लोबल मार्केट में बढ़ते तेल कीमतों को ध्यान में रखते हुए यह छूट दी गई है।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप के ऊर्जा एजेंडे के तहत उठाया गया यह एक अस्थाई कदम है। यह स्पेशल पैकेज 03 अप्रैल तक लागू रहेगा। उन्होंने बताया कि यह छूट केवल अब तक लोड हो चुके कच्चे तेल टैंकरों पर ही लागू होगा। आगे उन्होंने बताया कि भारत अमेरिका का सबसे महत्वपूर्ण पार्टनर है। हम उम्मीद करते हैं कि अमेरिका से भी तेल खरीद को भारत तेजी लाएगा। पोस्ट में बोला गया कि ईरान द्वारा ग्लोबल एनर्जी मार्केट को बाधित करने का प्रयास किया, जिससे यह संकट उत्पन्न हुआ।
रिकॉर्ड स्तर पर कच्चे तेल की कीमत
ईरान-इजरायल और अमेरिका युद्ध के तुरंत बाद ईरान ने ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ को बंद कर दिया। साथ ही सऊदी-अरब की बड़ी तेल रिफाइनरी सऊदी-अरामको सहित इराक के प्रमुख तेल क्षेत्रों पर भी हमला किया। जिससे तेल सप्लाई बाधित हुई और वैश्विक तेल कीमतों में उछाल देखने को मिला। कच्चे तेल की कीमत रिकॉर्ड 83 डॉलर के पार कर गया। आपको बता दें कि ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ से दुनिया में कुल तेल का 20 प्रतिशत सप्लाई होता है।
भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है रूसी तेल
यूक्रेन-रूस युद्ध के समय से ही भारत रूस से कच्चा तेल बड़ी मात्रा में खरीद रहा है। पश्चिमी देशों द्वारा लगातार दबाव बनाने के बाद भी भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीद को जारी रखा। इस दौरान विश्व के कई देशों में मंहगाई देखने को मिली, लेकिन भारत में नियंत्रित रही। इस दौरान रूस ने भारत को सस्ती कीमतों पर कच्चा तेल उपलब्ध कराया।
इससे भारत में डीजल-पेट्रोल की कीमतें स्थिर रही। इसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी देखने को मिला। वैश्विक अस्थिरता के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनी रही।
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