
Ola Electric Case : ठाणे के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने ओला इलेक्ट्रिक के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कंपनी को निर्देश दिया है कि वह अपने एक ग्राहक को खराब स्कूटर के बदले नया स्कूटर उपलब्ध कराए या पूरी रकम लौटाए। कोर्ट ने इसे “सेवा में भारी कमी” और “गलत व्यापारिक व्यवहार” माना।
डिलीवरी के बाद ही आईं तकनीकी समस्याएं
नवी मुंबई के एक वकील ने जुलाई 2024 में ₹96,997 का भुगतान करके ओला इलेक्ट्रिक का नया स्कूटर खरीदा। लेकिन डिलीवरी के दो दिन बाद ही पहली लंबी राइड के दौरान स्कूटर की स्पीड और बैटरी में गंभीर दिक्कतें आईं। बैटरी अचानक 21% से 3% पर आ गई और स्कूटर बीच सड़क पर रुक गया, जिससे ग्राहक की जान जोखिम में पड़ सकती थी।
शिकायतों के बावजूद ओला की ठंडी प्रतिक्रिया
ग्राहक ने कई ईमेल और व्हाट्सएप मैसेज के जरिए समस्या बताई, लेकिन कंपनी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली। जब शिकायत सोशल मीडिया पर उठाई गई, तब जाकर स्कूटर को सर्विस के लिए लिया गया। महीनों बाद स्कूटर वापस मिला, लेकिन वह गंदा और खरोंचों से भरा हुआ था।
कोर्ट की सख्त कार्रवाई
कोर्ट ने पाया कि स्कूटर की तकनीकी समस्याएं पहले दिन से ही मौजूद थीं, और कंपनी की लापरवाही स्पष्ट है। ओला की तरफ से सुनवाई में कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ।
कोर्ट ने आदेश दिया:
- ग्राहक को उसी मॉडल का नया स्कूटर दिया जाए।
- यदि नया स्कूटर उपलब्ध नहीं हो, तो पूरे ₹96,997 के साथ 6% सालाना ब्याज लौटाया जाए।
- मानसिक परेशानी के लिए ₹20,000 और कानूनी खर्च के रूप में ₹15,000 का भुगतान किया जाए।
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