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धर्म बदला तो आरक्षण का लाभ नहीं…, हिंदू से इस्लाम अपनाने वालों के OBC आरक्षण पर SC का फैसला

OBC Reservation : हिंदू धर्म से इस्लाम अपनाने वाले लोगों को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण का लाभ मिलेगा या नहीं, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है. अदालत ने कहा कि हिंदू सामाजिक व्यवस्था के पिछड़े वर्ग या अनुसूचित जाति से संबंधित व्यक्ति दूसरे धर्म को अपनाने के बाद उसी आधार पर आरक्षण का लाभ पाने का दावा नहीं कर सकता. धर्म परिवर्तन के बाद हिंदू सामाजिक व्यवस्था में मौजूद सामाजिक पिछड़ापन अपने आप दूसरे धर्म की सामाजिक व्यवस्था में स्थानांतरित नहीं हो जाता.

न्यायमूर्ति पी.के. मिश्रा और न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर की पीठ ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है. हाईकोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसके तहत इस्लाम अपनाने वाले कुछ लोगों को पिछड़ा वर्ग मुस्लिम श्रेणी में आरक्षण का लाभ देने की अनुमति दी गई थी. तमिलनाडु सरकार ने हाईकोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.

सात मुस्लिम समुदायों से जुड़ा था मामला

यह मामला तमिलनाडु सरकार के उस सरकारी आदेश से जुड़ा था, जिसमें सात मुस्लिम समुदायों को पिछड़ा वर्ग के रूप में मान्यता देने की व्यवस्था को चुनौती दी गई थी. इस आदेश के तहत अन्य पिछड़ा वर्ग, अति पिछड़ा वर्ग, विमुक्त समुदायों और अनुसूचित जाति से इस्लाम अपनाने वाले व्यक्तियों को पिछड़ा वर्ग मुस्लिम श्रेणी में शामिल करने की अनुमति दी गई थी.

मद्रास हाईकोर्ट ने इस आदेश को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया था. अदालत ने कहा था कि जाति और संबंधित समुदाय की सदस्यता जन्म से निर्धारित होती है. धर्म परिवर्तन के आधार पर किसी अधिसूचित समुदाय की सदस्यता अपने आप नहीं मिल जाती.

तमिलनाडु सरकार ने क्या दलील दी?

तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि उसका आदेश कोई नई पिछड़ा वर्ग श्रेणी बनाने के लिए नहीं था. सरकार के अनुसार, यह आदेश तमिलनाडु पिछड़ा वर्ग आयोग की सिफारिश पर जारी किया गया था. इसका उद्देश्य उन लोगों को केवल धर्म परिवर्तन के कारण आरक्षण से वंचित होने से बचाना था, जो संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धर्म की स्वतंत्रता का इस्तेमाल करते हैं.

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा और धर्म परिवर्तन के बाद पिछड़ा वर्ग का दर्जा देने से जुड़े इस मामले में तमिलनाडु सरकार की चुनौती को स्वीकार नहीं किया.

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