Lakhimpur Kheri Violence: किसानों को कुचलने वाले आरोपी आशीष मिश्रा की जमानत रद्द
Ashish Mishra Latest News: उत्तर प्रदेश में लखीमपुर खीरी हिंसा मामले (Lakhimpur Kheri Violence) मे पीड़ित परिवार के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। पीड़ितों ने मामलें में मुख्य अभियुक्त और केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे, आशीष मिश्रा की जमानत याचिका रद्द करने की मांग की थी।

Lakhimpur Kheri Violence: किसानों को थार से कुचलने वाले मुख्य आरोपी की ज़मानत पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला हो गया है। लखीमपुर खीरी मे तिकोनिया हिंसा के मुख्य आरोपी केंद्रीय ग्रहराज्य मंत्री के पुत्र आशीष मिश्रा की जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट ने फाइनल फैसला सुना दिया है।
आरोपी आशीष मिश्रा की जमानत पर फैसला
बताते चलें कि तिकुनीया हिंसा मामले के मुख्य आरोपी केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा (Lakhimpur Kheri Violence) के पुत्र आशीष मिश्रा को 10 फरवरी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज़मानत दे दी थी, किसान पक्ष के वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में आशीष मिश्रा की ज़मानत के विरोध में याचिका दायर की थी। किसान पक्ष के वकील सीनियर एडवोकेट दुष्यंत दवे, सीनियर एडवोकेट प्रशांत भूषण, एडवोकेट शशांक सिंह और एडवोकेट मोहम्मद अमान ने हिंसा के आरोपी आशीष मिश्र की जमानत के खिलाफ SLP (स्पेशल लीव प्रीडीशियन) सुप्रीम कोर्ट में एडमिट की थी।
जमानत रद्द करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला
स्पेशल लीव प्रीडीशियन एडमिट हो जाने के बाद सुप्रीम कोर्ट में बीते 24 मार्च, 30 मार्च, 4 अप्रैल और 14 अप्रैल को सुनवाई की गई और सुप्रीम कोर्ट ने फैसले को सुरक्षित रखा था। जहां आज 18 अप्रैल को आशीष मिश्रा की ज़मानत को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फाइनल फैसला सुना दिया और आज फैसला हो गया कि तिकुनीया हिंसा के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा की जमानत खारिज हो गई है अब उन्हें जेल में दोबारा जाना होगा।
आखिर क्या हुआ था?
आपको बता दें कि 21 फरवरी को उत्तर प्रदेश में लखीमपुर खीरी हिंसा मामले (Lakhimpur Kheri Violence) मे पीड़ित परिवार के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। पीड़ितों ने मामलें में मुख्य अभियुक्त और केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे, आशीष मिश्रा (Ashish Mishra) की जमानत याचिका रद्द करने की मांग की थी।
10 फरवरी को जेल से हो गए थे रिहा
वहीं उससे पहले इलाहबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने उन्हें जमानत दे दी थी। जिसके बाद 10 फरवरी को वो जेल से रिहा हो गए थे। फैसले को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार को घेरा है। संयुक्त किसान मोर्चा के नेता राकेश टिकैत ने फैसले के बाद कहा था कि मामले में योगी सरकार ने ठीक से पैरवी नहीं की। हालांकि सरकार ने कहा था कि फैसला न्यायालय का है और अदालत के फैसले में सरकार की कोई दखलअंदाजी नहीं है।