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पीएम मोदी और अमित शाह वोटों की चोरी कर जीत रहे चुनाव, ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार कर चलाया जाए देशद्रोह का मुकदमा- केजरीवाल

Election Commission Controversy : आम आदमी पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल ने वोट चोरी के आरोपों को लेकर मोदी सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए और SIR प्रक्रिया रद्द करने की मांग की। केजरीवाल ने पुराने चुनावों की समीक्षा और दोबारा चुनाव कराने की भी मांग रखी।

Election Commission Controversy : आम आदमी पार्टी की ओर से मोदी सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर बार-बार लगाए जा रहे वोट चोरी के आरोपों पर इंडियान एक्सप्रेस की एक खोजी रिपोर्ट ने मुहर लगा दी है। रिपोर्ट में हुए चौकाने वाले खुलासे के बाद ‘‘आप’’ के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इसे आजाद भारत का सबसे बड़ा घोटाला बताते हुए कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह वोटों की चोरी कर चुनाव जीतते जा रहे हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस वोट चोरी के सरगना हैं।

उन्होंने मांग की है कि ज्ञानेश कुमार को तत्काल गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की बिना मंजूरी चल रही एसआईआर प्रक्रिया गैर कानूनी है। इस प्रक्रिया को रद्द कर तीन साल पुरानी वोटर लिस्ट को बहाल किया जाए। साथ ही, दिल्ली, बिहार समेत पिछले कुछ सालें में हुए राज्य विधानसभा चुनावों को रद्द कर दोबारा कराया जाए।

वोटों की चोरी कर चुनाव जीत रहे शाह

बुधवार को “आप” मुख्यालय पर सांसद संजय सिंह और दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज के साथ प्रेस वार्ता कर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अभी तक इस देश में लोग सुना करते थे कि मोदी जी और अमित शाह वोटों की चोरी करके एक के बाद एक चुनाव जीतते जा रहे हैं। आज इंडियन एक्सप्रेस की स्टोरी ने साबित कर दिया है कि असल में ये लोग चुनावों की चोरी कर रहे हैं।

ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार किया जाए की उठाई मांग

ये वोटों की चोरी कर रहे हैं और बहुत बड़ा वोटों का घोटाला करके चुनाव जीतते जा रहे हैं। मोदी जी और अमित शाह की इस वोटों की चोरी के सरगना ज्ञानेश कुमार हैं। उन्होंने मांग की कि ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार किया जाए, उन पर मुकदमा चलाया जाए और पिछले कुछ सालों में दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में जितने चुनाव हुए हैं, ये सारे चुनाव रद्द करके दोबारा कराए जाएं।

चुनाव आयोग सिर्फ सर्वसम्मति या बहुमत से…

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला है कि चुनाव आयोग एक व्यक्ति का नाम नहीं है, चुनाव आयोग का मतलब है तीन लोग। चुनाव आयोग में एक मुख्य चुनाव आयुक्त और दो सदस्य होते हैं। तीनों मिलकर मीटिंग करते हैं और उस मीटिंग में सर्वसम्मति से या बहुमत से फैसले होते हैं। इन तीनों में से कोई अकेला व्यक्ति निर्णय लेने का अधिकार नहीं रखता। कोई अकेला व्यक्ति चुनाव आयोग नहीं चला सकता और कोई अकेला व्यक्ति चुनाव आयोग के अफसरों को आदेश नहीं दे सकता। मुख्य चुनाव आयुक्त केवल समान अधिकारियों में प्रथम (फर्स्ट अमंग इक्वल्स) होता है, यानी तीनों बराबर हैं। वह केवल मीटिंग की अध्यक्षता करता है, लेकिन उसके पास अकेले आदेश देने का कोई भी अधिकार नहीं है।

बिना मंजूरी जारी हो रहे आदेश- केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आज इंडियन एक्सप्रेस की स्टोरी यह कहती है कि ज्ञानेश कुमार पिछले कुछ सालों से अकेले चुनाव आयोग चला रहे हैं। दोनों चुनाव आयुक्तों ने बार-बार लिखित शिकायत दी है कि चुनाव आयोग के आदेश और अधिकार के बिना, नीचे के अफसरों को आदेश दिए जा रहे हैं। 28 अक्टूबर 2025 को चुनाव आयुक्तों में से एक सुखबीर सिंह संधू ने मुख्य चुनाव आयुक्त को चिट्ठी लिखी कि केंद्रीय चुनाव आयोग की मंजूरी के बिना भारत के चुनाव आयोग के नाम पर पत्र और आदेश जारी किए जा रहे हैं। सुखबीर सिंह संधू मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को चिट्ठी लिखते हैं कि चुनाव आयोग की मंजूरी के बिना आदेश जारी किए जा रहे हैं।

अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा कि 16 अप्रैल 2026 को सुखबीर सिंह संधू फिर चिट्ठी लिखते हैं कि इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी से संबंधित मॉड्यूल के बारे में उन्हें मीडिया से पता चला, और बिना चुनाव आयोग की मंजूरी के ये सारे आदेश जारी किए जा रहे हैं। 16 अप्रैल को सुखबीर सिंह संधू फिर लिखते हैं कि केंद्रीय चुनाव आयोग की मंजूरी के बिना आधिकारिक पत्र जारी किए जा रहे हैं। 24 अप्रैल को चुनाव आयुक्त विवेक जोशी लिखते हैं कि केंद्रीय चुनाव आयोग की मंजूरी के बिना आधिकारिक पत्र जारी किए जा रहे हैं।

ज्ञानेश कुमार आदेश देते जा रहे- केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दोनों चुनाव आयुक्त कितनी चिट्ठी लिखेंगे? चिट्ठी पे चिट्ठी, नोट पे नोट भेजे जा रहे हैं कि चुनाव आयोग की मीटिंग्स और आधिकारिक मंजूरी के बिना आदेश व सर्कुलर जारी किए जा रहे हैं। ये सारे आदेश और सर्कुलर असंवैधानिक और गैर-कानूनी हैं। तो बिना चुनाव आयोग की मंजूरी के पिछले कुछ सालों में जितने भी आदेश जारी किए गए हैं, वह सारे के सारे गैर-कानूनी हैं। कई-कई महीनों तक चुनाव आयोग की मीटिंग्स नहीं हो रही हैं और ज्ञानेश कुमार आदेश देते जा रहे हैं। वे अपने आप आदेश दे देते हैं कि यह कर दो, वह कर दो।

गैर कानूनी तरीके से डिलिट किए गए करोड़ों वोट- केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पूरा एसआईआर प्रोसेस, जिसके जरिए 30 राज्यों के अंदर 13 करोड़ से ज्यादा लोगों के नाम डिलीट कर दिए गए, वह पूरा का पूरा एसआईआर प्रोसेस गैर-कानूनी है क्योंकि उसको चुनाव आयोग ने आधिकारिक तौर पर अप्रूव नहीं किया है। उसके तहत पारित किए गए सारे आदेश गैर-कानूनी हैं। उस पूरे एसआईआर प्रोसेस को रद्द किया जाए। इंडियन एक्सप्रेस की स्टोरी में लिखा हुआ है कि संविधान और कानून के तहत हर इलाके के एसडीएम को नए वोट बनाने और गलत वोट काटने का अधिकार है, जिसे ईआरओ (इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर) बोलते हैं। ऊपर से नीचे तक केवल उसी को किसी का भी वोट जोड़ने या काटने का अधिकार है। यहां तक कि ज्ञानेश कुमार को भी किसी का वोट जोड़ने या काटने का अधिकार नहीं है।

वोट जोड़ने-काटने का अधिकार एसडीएम से छीनकर…

अरविंद केजरीवाल ने बताया कि इस स्टोरी के अंदर दोनों चुनाव आयुक्तों ने आरोप लगाया है कि ईआरओ की वेबसाइट एक्सेस, जिस पर जाकर ईआरओ लोगों के नाम जोड़ता, काटता या बदलता है, उसे बंद और प्रतिबंधित कर दिया गया है। दिल्ली में बैठे कुछ लोगों के पास पूरे देश की वोटर लिस्ट का एक्सेस है। इसका मतलब वे पूरे देश में जिसका मर्जी वोट कटवा रहे हैं और जिसका मर्जी वोट जुड़वा रहे हैं। संविधान के तहत जिस ईआरओ को पावर दी गई है, उसकी पावर छीन ली गई है और चुनाव आयोग की बिल्डिंग के अंदर जो लोग बैठे हैं, उनको पूरे देश के किसी का भी वोट काटने और जोड़ने का अधिकार दे दिया गया है। इससे बड़ा घोटाला इस देश के अंदर नहीं हो सकता।

आयुक्तों ने सारे बदलावों को गैरकानूनी बताया- केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हमारे देश के स्वतंत्रता सेनानियों ने आजादी की लड़ाई दो कारणों से लड़ी थी- एक यह कि अंग्रेजों को भगाना है और दूसरा यह कि हमारे देश के अंदर जनतंत्र होना चाहिए, जनता को अपनी सरकार चुनने का अधिकार होना चाहिए। जब वोटर लिस्ट ईआरओ या एसडीएम नहीं बना रहे, बल्कि चुनाव आयोग के दिल्ली स्थित ऑफिस से बन रही है, तो इसका मतलब यह है कि पूरे देश की वोटर लिस्ट खराब हो चुकी है।

पिछले दो-तीन साल के अंदर वोटर लिस्ट में जितने भी बदलाव किए गए हैं, वे सारे बदलाव खारिज किए जाएं और दोबारा तीन साल पुरानी वोटर लिस्ट को बहाल किया जाए। कोई नया आदमी अपना वोटर कार्ड बनवाता है तो उसे फॉर्म-6 भरना पड़ता है। फॉर्म-6 के अंदर इन्होंने जो बदलाव किए हैं, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कहा है कि वे सारे बदलाव गैर-कानूनी और असंवैधानिक हैं। तो इसके तहत जितने भी नए वोट बनाए गए हैं, वे सारे वोट खारिज किए जाएं।

वोट घोटाला देश की जड़ों को हिलाने वाला है- केजरीवाल

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आज हम यह मांग करते हैं कि एसआईआर का जो प्रोसेस है, उसे रद्द किया जाए और उसके तहत किए गए सारे बदलाव खारिज करके 3 साल पुरानी वोटर लिस्ट को बहाल किया जाए। दूसरा, ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार किया जाए और उनके खिलाफ राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलाया जाए। और तीसरा, पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, हरियाणा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में जो चुनाव हुए हैं, इनके चुनाव रद्द कराकर दोबारा चुनाव कराए जाएं। मुझे लगता है कि आजाद भारत का यह सबसे बड़ा स्कैंडल है और यह हमारे देश की जड़ों को हिलाने वाली बात है।

ये भी पढ़ें- CEC ज्ञानेश कुमार पर केजरीवाल का बड़ा हमला, इस्तीफे की मांग, वोटर लिस्ट से 13 करोड़ नाम हटाने का दावा

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