Uttar Pradesh

सहारनपुर कलेक्ट्रेट की पुरानी मस्जिद पर बुलडोजर एक्शन, जानें क्यों मचा बवाल

Saharanpur Mosque News : पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद को गिराए जाने की कार्रवाई के बाद माहौल गरमा गया है. शनिवार सुबह करीब चार बजे प्रशासन ने मस्जिद के ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की. मौके पर छह बुलडोजर लगाए गए, जिनसे मस्जिद के एक हिस्से को गिराया जा चुका है. कार्रवाई के बाद इलाके में तनाव को देखते हुए करीब 200 जवानों की तैनाती की गई है.

मस्जिद पर हुई कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है. मौके पर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौजूद हैं. इस बीच वहां पहुंचने की कोशिश कर रहीं सपा सांसद इकरा हसन को हाउस अरेस्ट किए जाने की बात सामने आई है. विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले हुई इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. समाजवादी पार्टी के साथ कांग्रेस ने भी प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं.

कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुई कार्रवाई

प्रशासन के मुताबिक, सिटी मजिस्ट्रेट ने पिछले महीने कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को अवैध मानते हुए उसे हटाने का आदेश दिया था. मुस्लिम पक्ष ने इस फैसले को जिला एवं सत्र न्यायालय में चुनौती दी थी. शुक्रवार को जिला जज की अदालत ने मुस्लिम पक्ष की याचिका खारिज कर दी. इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की.

2025 में हुई थी शिकायत

कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित यह मस्जिद करीब 3000 वर्ग फीट में फैली है. 10 फरवरी 2025 को बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने इसे अवैध बताते हुए जिलाधिकारी से शिकायत की थी. शिकायत में मस्जिद परिसर के कमरों और डाकघर से किराया वसूले जाने का आरोप लगाया गया था. इसके बाद डीएम ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए. जांच में मस्जिद को अवैध पाया गया.

जिला जज ने आदेश बरकरार रखा

इसके बाद 24 मार्च 2025 को प्रशासन ने नगर मजिस्ट्रेट कोर्ट में याचिका दाखिल की. 16 जुलाई 2026 को कोर्ट ने मस्जिद को अवैध मानते हुए उसे हटाने और 6.41 करोड़ रुपये हर्जाना वसूलने का आदेश दिया था. कब्जेदारों को 30 दिन का समय दिया गया था.

20 जुलाई को मस्जिद पक्ष ने इस आदेश के खिलाफ जिला कोर्ट का रुख किया. 2 सितंबर को जिला जज सतेंद्र कुमार की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए याचिका खारिज कर दी.

इमरान मसूद ने कार्रवाई पर उठाए सवाल

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने मस्जिद गिराए जाने की कार्रवाई को लेकर प्रशासन पर निशाना साधा, उन्होंने कहा कि रातभर लोग अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश करते रहे. उनका आरोप है कि मस्जिद को गिराने के साथ संविधान में दिए गए अधिकारों को भी रौंदा गया है.

इमरान मसूद ने दावा किया कि यह मस्जिद 1911 से पहले की है और इसकी मलकियत अब भी वहीद खान याकूब खां के नाम है, उन्होंने कहा कि आदेश में 30 दिन का समय दिया गया था और उनके मुताबिक अभी 22 दिन बाकी थे. कांग्रेस सांसद ने कहा कि रातों-रात मस्जिद को चारों तरफ से घेर लिया गया और अब इस मामले में कानून के दायरे में रहकर लड़ाई लड़ी जाएगी.

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