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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की तैयारी शुरू, जानें व्रत, पूजा और फलाहार के जरूरी नियम

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव के साथ व्रत और पूजा का विशेष महत्व है। श्रद्धालु निशिता काल में बाल गोपाल की पूजा करते हैं। व्रत रखने वालों को सात्विक भोजन, फलाहार और नियमों का पालन करना चाहिए। जानिए जन्माष्टमी व्रत शुरू करने का समय, पूजा विधि, खाने योग्य चीजें और किन वस्तुओं से बचना चाहिए।

Janmashtami 2026 : श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व इस साल 4 सितंबर को मनाया जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के अवसर पर श्रद्धालु उपवास रखते हैं और रात में निशिता काल के दौरान विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। मान्यता है कि भगवान कृष्ण का जन्म मध्य रात्रि में हुआ था, इसलिए इसी समय पूजा और व्रत पारण का विशेष महत्व माना जाता है।

सप्तमी तिथि से शुरू होती हैं व्रत की तैयारियां

जन्माष्टमी व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को सप्तमी तिथि से ही खानपान और आचरण में संयम बरतने की सलाह दी जाती है। इस दौरान सात्विक भोजन करने, लहसुन-प्याज, मांसाहार और मदिरा से दूरी बनाए रखने की परंपरा है। कई मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में कुछ सब्जियों का सेवन भी नहीं किया जाता।

जन्माष्टमी पूजा की विधि

व्रत वाले दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। दिनभर भगवान कृष्ण के मंत्रों का जाप और स्मरण किया जाता है। शाम को दोबारा स्नान के बाद रात की पूजा की तैयारी की जाती है।

निशिता काल में होती है विशेष पूजा

भगवान श्रीकृष्ण के जन्म समय यानी मध्य रात्रि में निशिता काल के दौरान पूजा की जाती है। इस समय बाल गोपाल को पंचामृत से स्नान कराया जाता है, नए वस्त्र पहनाए जाते हैं और फूल, चंदन व माला से श्रृंगार किया जाता है। इसके बाद उन्हें पालने में झुलाने की परंपरा है।

व्रत में क्या खा सकते हैं

फलाहार व्रत रखने वाले लोग केला, सेब, अनार जैसे फल खा सकते हैं। इसके अलावा दही, साबूदाना और कुट्टू के आटे से बने व्यंजन भी ग्रहण किए जाते हैं। व्रत के भोजन में सेंधा नमक का उपयोग किया जाता है। गुड़, शहद और घी को भी बेहतर विकल्प माना जाता है।

इन चीजों से करें परहेज

जन्माष्टमी व्रत में अन्न का सेवन नहीं किया जाता। इसके अलावा लहसुन-प्याज, मांसाहार और मदिरा से बचने की परंपरा है। कुछ मान्यताओं के अनुसार लौकी, मूली, गाजर और चुकंदर जैसी चीजों से भी परहेज किया जाता है। निर्जला व्रत रखने वालों को जल समेत किसी भी चीज का सेवन नहीं करना होता।

व्रत पारण का समय

रात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद पूजा संपन्न कर चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। इसके बाद व्रत का पारण किया जा सकता है। कुछ श्रद्धालु अगले दिन सूर्योदय के बाद व्रत खोलते हैं। निर्जला व्रत रखने वालों को अपनी क्षमता और स्वास्थ्य का ध्यान रखते हुए व्रत करना चाहिए।

Disclaimer : यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। हिंदी ख़बर इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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