
Oil Prices : सरकार ने आम लोगों को राहत देने के लिए शुक्रवार को पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में बड़ा बदलाव किया है. दोनों ईंधनों पर 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई है. इस फैसले के बाद पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटकर 3 रुपये प्रति लीटर रह गई है, जबकि डीजल पर यह पूरी तरह खत्म कर दी गई है. यह कदम वैश्विक ऊर्जा संकट को देखते हुए उठाया गया है, जो अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण और गहरा गया है. ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद किए जाने से हालात और गंभीर हो गए हैं.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग है, जहां से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की लगभग 20 प्रतिशत आपूर्ति गुजरती है. रोजाना करीब 20 से 25 मिलियन बैरल तेल इसी रास्ते से आता-जाता है. भारत भी अपनी तेल जरूरतों का एक हिस्सा इसी मार्ग से आने वाली सप्लाई पर निर्भर रहा है. अनुमान के अनुसार, देश के कुल कच्चे तेल आयात का एक बड़ा हिस्सा लगभग 2.2 से 2.8 मिलियन बैरल प्रतिदिन इसी रास्ते से आता रहा है.
ड्यूटी बढ़ने पर क्या होता है असर
बता दें कि पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी का सीधा असर आम लोगों की जेब और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है. यह टैक्स केंद्र सरकार द्वारा ईंधन पर लगाया जाता है
जब एक्साइज ड्यूटी बढ़ती है, तो तेल कंपनियां इसकी लागत को कीमतों में जोड़ देती हैं, जिससे ईंधन और महंगा हो जाता है. वहीं, ड्यूटी कम होने पर पेट्रोल और डीजल सस्ते हो जाते हैं, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलती है. सरकार के लिए यह टैक्स राजस्व का एक प्रमुख स्रोत होता है, जिसका उपयोग सड़कों, पुलों, रक्षा खर्च और अलग-अलग सरकारी योजनाओं पर खर्च किया जाता है.
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