CEC Gyanesh Kumar Resignation : कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) स्टूडेंट प्रोटेस्ट के बाद अब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर हमलावर हो गई है। CJP ने CEC ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे में इस्तीफा देने का अल्टीमेटम दिया है, और कहा है कि यदि वें इस्तीफा नहीं देते हैं तो देशभर में आंदोलन किया जाएगा। दिल्ली में अभिजीत दीपके ने PC करते हुए कहा कि लोकतंत्र का मतलब है कि जनता अपनी सरकार चुने। लेकिन जब से ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त बने हैं, तब से सरकार यह तय कर रही है कि कौन वोट करेगा और कौन नहीं।
13 करोड़ से ज्यादा वोट डिलीट किए
2024 के चुनाव में BJP बहुमत हासिल नहीं कर सकी। ‘400 पार’ का नारा देने के बाद वह 240 सीटों पर आ गई। इसके बाद उन्हें लगा कि देश का मूड बदल रहा है और क्षेत्रीय ताकतें बहुत मजबूत हो रही हैं। ज्ञानेश कुमार इस देश के सबसे बड़ा गद्दार हैं। उन्होंने SIR के जरिए देश में 13 करोड़ से ज्यादा वोट डिलीट किए। लोगों से वोट देने का अधिकार छीना जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बुधवार को एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR को लेकर पिछले 10 महीनों में आयोग के फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की है।
एक-एक कर हुआ चुनावी नुकसान
चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर जारी बहस के बीच CJP फाउंडर ने विपक्षी नेताओं की हार और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे, NCP, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, दिल्ली के अरविंद केजरीवाल और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जैसे नेताओं को एक-एक कर चुनावी नुकसान हुआ।
उन्होंने कहा कि यह केवल संयोग नहीं लगता, बल्कि इसमें एक पैटर्न दिखाई देता है। उनके मुताबिक, ये सभी नेता 2024 में एक साथ आए थे और उन्होंने मिलकर चुनाव प्रचार किया था। उन्होंने सवाल उठाया कि इसके बाद इन नेताओं को अलग-अलग कैसे नुकसान हुआ।
वोट हटाने को लेकर लगाए आरोप
CJP फाउंडर ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सीट से करीब 50 हजार वोट हटाए गए और वह लगभग 15 हजार वोटों से हार गईं। उन्होंने यह भी दावा किया कि एमके स्टालिन की सीट से करीब 1 लाख वोट हटाए गए और वह लगभग 45 हजार वोटों से हार गए।
इसके अलावा उन्होंने कहा कि दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सीट से करीब 40 हजार वोट हटाए गए और वह लगभग 4 से 5 हजार वोटों के अंतर से हार गए।
लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनाव पर उठाए सवाल
CJP फाउंडर ने कहा कि सवाल यह है कि क्या इस तरह की प्रक्रिया का इस्तेमाल केवल मजबूत विपक्षी नेताओं को कमजोर करने के लिए किया गया। उन्होंने कहा कि किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में नहीं होते हुए भी लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष की भूमिका जरूरी है। उन्होंने सवाल किया कि अगर पूरे विपक्ष को खत्म कर दिया जाए तो क्या इसे स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कहा जा सकता है।
चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की रिपोर्ट
चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर विवाद उस समय और बढ़ा जब इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद का दावा किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कहा कि कुछ फैसले उनकी जानकारी या मंजूरी के बिना लिए गए।
रिपोर्ट में दावा किया गया कि 28 अक्टूबर 2025 से 14 अगस्त 2026 के बीच आयोग के कुछ फैसलों पर 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की गईं। इनमें 16 अप्रैल को चार आपत्तियां शामिल थीं। इन आपत्तियों की प्रतियां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई थीं।
SIR प्रक्रिया को लेकर जारी है विवाद
यह पूरा विवाद बिहार में जून 2025 से शुरू हुई स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के बीच सामने आया। SIR के तहत मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू की गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं।
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