Nepal Flood News : नेपाल में आई अचानक बाढ़ के बाद राहत और बचाव अभियान के बीच सबसे बड़ा सवाल अब उन 573 मजदूरों को लेकर है, जिनका अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है. रसुवा और नुवाकोट जिलों में हाइड्रोपावर परियोजनाओं और सुरंगों में काम कर रहे ये मजदूर बाढ़ के बाद लापता बताए जा रहे हैं या फिर मलबे के बीच फंसे हुए हैं.
बुधवार को आई बाढ़ अपने साथ बर्फ, चट्टान और भारी मलबा लेकर आई. इससे लहेंडे-भोटे कोशी-त्रिशूली नदी सिस्टम में पानी का बहाव अचानक बढ़ गया और कई हाइड्रोपावर परियोजनाएं इसकी चपेट में आ गईं.
अपर त्रिशूली-1 में सबसे ज्यादा लोग लापता
नेपाल सरकार के अनुसार, 11 हाइड्रोपावर साइट्स पर कुल 934 मजदूरों के लापता होने की सूचना मिली थी. इनमें से 361 लोग सुरक्षित निकल आए या उन्हें बचा लिया गया. लेकिन 573 मजदूर अब भी लापता हैं. अधिकारियों का कहना है कि वास्तविक संख्या इससे ज्यादा भी हो सकती है, क्योंकि निर्माणाधीन परियोजनाओं में कुछ मजदूर सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो सकते हैं.
अपर त्रिशूली-1 में 322 मजदूर, अपर त्रिशूली-3B में 122, रसुवागढ़ी हाइड्रोपावर में 44 और अपर त्रिशूली-3A में 43 मजदूरों का पता नहीं चला है.
10 से 12 फीट ऊंचा था मलबा
बचे मजदूरों ने बताया कि पानी बेहद तेजी से बढ़ा. अपर त्रिशूली-1 के असिस्टेंट मैनेजर अशोक कुमार मंडल के मुताबिक, सुरंग के रास्ते में 10 से 12 फीट तक कीचड़ और मलबा भर गया था. करीब 120 मजदूर किसी तरह पहाड़ी रास्तों से पैदल निकलकर नुवाकोट पहुंचे और फिर बस से काठमांडू लाए गए.
नेपाल सेना ने बचाव अभियान में 15 हेलीकॉप्टर और कम से कम 84 प्रशिक्षित लोगों को लगाया है. चिलमे हाइड्रोपावर की सुरंग में फंसे छह लोगों की तलाश भी जारी है. बचाव दल करीब 130 मीटर अंदर तक पहुंच चुका है, लेकिन मलबे की बड़ी दीवार रास्ता रोक रही है.
भारत की NDRF टीम को तैयार रहने को कहा गया है, हालांकि नेपाल की ओर से अभी तक टीम भेजने का आधिकारिक अनुरोध नहीं आया है.
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