Unnao Rape Case : उन्नाव दुष्कर्म मामले में पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में हुई मौत के मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उनकी सजा को निलंबित करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। सोमवार, 19 जनवरी को दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर को पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में 10 साल की सजा सुनाई और 10 लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई थी।
इससे पहले दुष्कर्म मामले में सेंगर की सजा निलंबित करने के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी। अब हिरासत में मौत के मामले में भी हाईकोर्ट ने उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया है।
कोर्ट ने राहत देने से किया इनकार
हाईकोर्ट ने कहा कि जिस मामले में परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य की पुलिस हिरासत में मौत हुई हो, उसमें किसी तरह की नरमी नहीं बरती जा सकती। इसी आधार पर कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर को राहत देने से इनकार कर दिया। इस मामले में कुलदीप के भाई अतुल सिंह सेंगर और पांच अन्य लोगों को भी 10 साल की जेल की सजा सुनाई गई थी। इसी फैसले के खिलाफ सेंगर ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
जमानत देने का जताया कड़ा विरोध
सुनवाई के दौरान सेंगर ने दलील दी कि वह इस केस में करीब 9 साल जेल में काट चुका है और अब उसकी सजा के सिर्फ 11 महीने बाकी हैं। वहीं पीड़ित की ओर से वकील महमूद प्राचा ने सेंगर को जमानत देने का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि अगर सेंगर को जमानत मिलती है, तो पीड़ित और उसके परिवार की सुरक्षा को खतरा हो सकता है।
इस मामले में ठहराया दोषी
बता दें कि दिंसबर 2019 में दिल्ली की एक विशेष अदालत ने कुलदीप सेंगर को उन्नाव में एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार के आरोप में दोषी ठहराया था। अदालत ने उन्हें भारतीय दंड संहिता (IPC) और पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहक आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। साल 2020 में पीड़िता के पिता की पुलिस हिरासत में मौत हो गई, जिसके बाद अदालत ने कुलदीप सिंह को दोषी ठहराया था।
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